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Rajasthan Assembly Session: 21 मिनट ही चली विधानसभा; स्कूलों में प्रवेश के मुद्दे पर हुआ जोरदार हंगामा

Thu, 20 Aug 2026 02:50 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan Assembly Session : राजस्थान विधानसभा के 16वीं विधानसभा के छठे सत्र की शुरुआत गुरुवार को हुई। सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के सरकार के आदेश का विरोध किया। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही पहले दिन 21 मिनट तक चली। वहीं कांग्रेस ने पोद्दार मूक बधिर स्कूल से विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला। इसके बाद विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक धरने पर बैठ गए। 
 
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राजस्थान विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान विधानसभा के 16वीं विधानसभा के छठे सत्र की शुरुआत आज सुबह 11 बजे होगी। मानसून सत्र के पहले दिन सात दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, सदन की कार्यवाही से पहले कांग्रेस विधायक आवास से विधानसभा तक पैदल मार्च निकालेंगे। पार्टी का फोकस सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और जनता से जुड़े सवालों को सदन में उठाने पर रहेगा।
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बीजेपी भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी में

निकाय चुनावों के ऐलान के बीच बीजेपी भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी में है। बुधवार शाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आवास पर करीब दो घंटे तक विधायक दल की बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने विधायकों को सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को सदन में मजबूती से रखने का टास्क दिया।

छठे सत्र की बैठक सुबह 11 बजे

16वीं राजस्थान विधानसभा के छठे सत्र की बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। विधानसभा सचिवालय की कार्य-सूची के अनुसार शुरुआत में गत सत्र में पारित उन विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखा जाएगा, जिन्हें राज्यपाल की स्वीकृति मिल चुकी है।

सात दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि

सदन में सात पूर्व जनप्रतिनिधियों के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा जाएगा। इनमें पूर्व राज्यपाल डी.वाई. पाटील, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. भास्कर राव सहित राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य शामिल हैं।
 

राजस्थान विधानसभा परिसर में प्रवेश को लेकर कांग्रेस विधायकों का हंगामा

राजस्थान विधानसभा परिसर में प्रवेश को लेकर हंगामा हो रहा है। विधानसभा के मुख्य दरवाजे पर कांग्रेस विधायकों और मार्शल प्रतिनिधियों के बीच विवाद की स्थिति बनी है। मार्शलों ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस विधायक अंदर प्रवेश करने पर अड़ गए। मौके पर काफी देर तक गहमागहमी बनी है। कांग्रेस विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।

विधायक अमीन कागजी का सरकार पर हमला

विधायक अमीन कागजी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया है। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लोकतंत्र की हत्या करार दिया। कागजी ने कहा कि सरकार जनता के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति और पिछले दो वर्षों में बच्चों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और विधानसभा अध्यक्ष पर भी निशाना साधा।

कांग्रेस विधायकों का धरना, अंदर जाने पर अड़े

राजस्थान विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक धरने पर बैठ गए। विधायक शिक्षा विभाग में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि उन्हें विधानसभा परिसर में प्रवेश से रोका जा रहा है। विधायक अंदर जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

कांग्रेस का विरोध तेज, सचिन पायलट भी धरने में शामिल हुए

कांग्रेस का विरोध तेज - फोटो : अमर उजाला
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को विधानसभा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि मामले में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे। इस दौरान सचिन पायलट भी धरने में शामिल हुए।

पहली बार विधायकों को रोका गया: हिंडोली विधायक अशोक चांदना

हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने कहा कि वे 13 साल से विधायक हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भी पहली बार देखने को मिला है कि सत्र के पहले दिन एक भी कांग्रेस विधायक सदन में नहीं पहुंचा।

रवींद्र सिंह भाटी ने की सरकारी भर्ती में इंटरव्यू खत्म करने की मांग

रवींद्र सिंह भाटी ने 4200 ग्रेड पे तक की सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी तरह खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर रोक लगेगी। भाटी ने ग्रामीण युवाओं को समान अवसर देने की वकालत की। साथ ही चेतावनी दी कि युवाओं के आंदोलन में सरकारों को गिराने की ताकत है।

थावरचंद डामोर का सरकार पर हमला, बोले- आदिवासियों के साथ हुआ राजनीतिक छलावा

राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने आदिवासी मुद्दों, विश्व आदिवासी दिवस को लेकर हुए विवाद और आदिवासी क्षेत्रों की बदहाली को लेकर सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी आदिवासी समाज की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। विभिन्न सरकारों ने आदिवासी समाज के वास्तविक विकास के बजाय राजनीतिक छलावा अधिक किया है।

पोद्दार मूक बधिर स्कूल में प्रवेश से जूली को रोका गया

टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल का सविनय अवग्या मार्च  पोद्दार मूक बधिर स्कूल से विधानसभा तक निकाला गया। नेता प्रतिपक्ष टेका राम जूली पोद्दार मूक बधिर स्कूल की दुर्दशा देखने पहुंचे थे। राज्य सरकार के नए आदेश के कारण गेट पर उनको रोक लिया गया। 
जूली के समर्थन में पूरा विधायक दल पहुंच गया है। अब इस आदेश और शिक्षा व्यवस्थाओं की दुर्दशा पर  विधानसभा की तरफ मार्च  किया जा रहा है।  



 

डोटासरा का सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप

डोटासरा ने सरकार पर तानाशाही का रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूलों में मीडिया की पहुंच सीमित करने से सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति, शिक्षकों की कमी, विद्यार्थियों की समस्याओं और अन्य व्यवस्थागत खामियों को सामने लाने में परेशानी होगी। 

 

बच्चों की निजता और पढ़ाई के माहौल को सुरक्षित रखना हमारा उद्देश्य-शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मीडिया की एंट्री से जुड़े आदेश का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य मीडिया को प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि बच्चों की निजता और पढ़ाई के माहौल की सुरक्षा करना है। मंत्री के मुताबिक, पत्रकार पूर्व अनुमति लेकर स्कूलों में जा सकते हैं।

पहले दिन 21 मिनट ही चली विधानसभा

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के विरोध के बीच सदन की कार्यवाही करीब 21 मिनट ही चली। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा गेट के बाहर चल रहा धरना समाप्त किया। 
स्कूलों में मीडिया एंट्री का मुद्दा अब विधानसभा सत्र में भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख विषय बन गया है। कांग्रेस ने जहां इसे सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़ते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है, वहीं सरकार इसे विद्यार्थियों की निजता और शैक्षणिक माहौल से जुड़ा कदम बता रही है।

स्कूलों की हालत बहुत खराब, सरकार चाह रही छुपाना-सचिन पायलट

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, फोटो-वीडियो और रिकॉर्डिंग पर रोक से जुड़े हालिया आदेश को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर स्कूलों की व्यवस्था सही है तो फोटो खींचने या पत्रकारों के जाने पर रोक लगाने की जरूरत क्या है? सरकार को आदेश जारी कर वास्तविक स्थिति छिपाने के बजाय स्कूलों की छतें, भवन, पेयजल व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

विपक्ष के नेता नहीं आए, बहुत खेद की बात-उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि कांग्रेस को हमारे मुख्यमंत्री का आभार प्रकट करना चाहता हूं। उन्होंने रक्षा बंधन के अवसर पर दो दिनों के लिए महिलाओं को बस में निशुल्क सफर करने की छूट दी है ताकि वे अपने संबंधियों और भाइयों के यहां जाकर रक्षा बंधन का त्योहार मना सकें। उन्होंने आगे विधानसभा के बाहर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन और मार्च पर कहा कि विपक्ष के नेताओं को सदन में आना चाहिए। वे नहीं आए तो यह बहुत खेद की बात है।

कांग्रेस सिर्फ हंगामा करना चाहती है-मंत्री झाबर सिंह खर्रा

राज्य सरकार में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि  स्वच्छ लोकतंत्र का यह तकाजा है कि आपका कोई भी विचार है या मांग हो, आप शालीनतापूर्वक तरीके से उसे सदन में रखें और आप जब सदन में तथ्यात्मक तरीके से अपनी बात रखेंगे तो सत्ता पक्ष को निश्चित रूप से उस पर विचार करने को विवश होना पड़ेगा मगर कांग्रेस ये नहीं चाहती है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है। उन्हें सिर्फ हंगामा खड़ा करना था। उन्होंने अपने आचरण से इसे साफ कर दिया।

कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया था शिक्षा विभाग को-विधायक गोपाल शर्मा

कांग्रेस विधायकों के सदन में नहीं आने पर विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस विधायकों को आमंत्रित कर रहे थे। पर वे आए नहीं। भैंरोसिंह शेखावत के समय राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में  सबसे ऊपर था। इसके पहले कांग्रेस शासन काल में सबसे नीचे थे। अब कांग्रेस जो कर रही है वो सही नहीं है। 

पहली बार हुआ जब विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोका गया-हिंडोली विधायक अशोक चांदना

हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने कहा कि वे 13 साल से विधायक हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भी पहली बार देखने को मिला है कि सत्र के पहले दिन एक भी कांग्रेस विधायक सदन में नहीं पहुंचा।
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विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विपक्ष की खाली बेंचों को देखकर जताई चिंता

राजस्थान विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन में विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष की बेंचों को खाली देखकर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें इस स्थिति से पीड़ा हो रही है। अध्यक्ष ने कहा कि सदन में विपक्ष की मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और विपक्ष को अपने मुद्दे सदन के भीतर उठाने चाहिए। वासुदेव देवनानी ने कहा कि शुरुआत में विषय विधानसभा परिसर में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर था। उन्होंने बताया कि गेट नंबर-6 से विधायकों के आने की व्यवस्था की गई थी। जो विधायक पैदल आना चाहते हैं, उन्हें भी आने की अनुमति है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मार्शल की ओर से एक-एक करके विधायकों को गेट से अंदर आने की बात कही गई थी।
अध्यक्ष के मुताबिक, कुछ विधायक पहले इस व्यवस्था के तहत अंदर आए थे। इसके बाद सुरक्षा कारणों से अन्य विधायकों को भी एक-एक करके विधानसभा में प्रवेश करने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बावजूद कई विपक्षी विधायक अब तक सदन में नहीं पहुंचे हैं। देवनानी ने कहा कि इस तरह की स्थिति ठीक नहीं है और सभी सदस्यों को सदन की कार्यवाही में भाग लेना चाहिए।

उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि सभी सदस्य सदन में आएं और जिन विषयों को लेकर वे अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें विधानसभा के भीतर उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को अपने विषय रखने का पूरा सम्मान और अधिकार है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसके सवालों तथा मुद्दों पर चर्चा होना जरूरी है। देवनानी ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात मर्यादा और विधानसभा के नियमों के तहत रखनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ दल से भी अपेक्षा जताई कि विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर सरकार संज्ञान ले और उनका उचित जवाब दे।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान के बाद अब विपक्ष के प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में उसकी भागीदारी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से सदन की गरिमा बनाए रखते हुए कार्यवाही में भाग लेने और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप अपने-अपने दायित्व निभाने की अपील की है।
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