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Screen Time: बच्चे को फोन देने से ज्यादा खतरनाक है उनके सामने खुद फोन चलाना, सभी माता-पिता दें ध्यान

Fri, 21 Aug 2026 10:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बच्चे की भाषा के विकास पर उसके अपने स्क्रीन टाइम से ज्यादा असर माता-पिता के फोन इस्तेमाल का हो सकता है। यानी समस्या केवल बच्चे के हाथ में मौजूद स्क्रीन नहीं, बल्कि वह स्क्रीन भी हो सकती है जो हर समय माता-पिता के हाथ में रहती है।
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माता-पिता का ज्यादा स्क्रीन टाइम नुकसानदायक - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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तमाम अध्ययन इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल-लैपटॉप या टीवी जैसी किसी भी स्क्रीन पर आप जितना ज्यादा समय बिताते हैं, उससे सेहत को उतना ज्यादा खतरा हो सकता है। ये शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो है ही, साथ ही लंबे समय में इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। अध्ययनों में लगातार अलर्ट किया जाता रहा है कि स्क्रीन टाइम बच्चों की सेहत और विकास के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, छोटे बच्चों को मोबाइल फोन देना उनके जीवन के साथ खेलने जैसा है, पर इससे पहले सभी माता-पिता को भी अपनी इस आदत में सुधार लाने की जरूरत है। इसी को लेकर हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि अगर माता-पिता छोटे बच्चों के सामने अक्सर फोन चलाते रहते हैं या लैपटॉप पर काम करते रहते हैं तो ये उनके बच्चों की भाषा सीखने और बोलने की क्षमता पर असर डाल सकता है।

अध्ययन में पाया गया है कि बच्चों की भाषा के विकास पर उसके खुद के मोबाइल चलाने से ज्यादा असर माता-पिता के फोन इस्तेमाल का हो सकता है। यानी समस्या केवल बच्चे के हाथ में मौजूद स्क्रीन नहीं, बल्कि वह स्क्रीन भी हो सकती है जो हर समय माता-पिता के हाथ में रहती है।
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मम्मी-पापा का फोन चलाना बच्चे की क्षमताओं पर कैसे असर डाल सकता है, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

बच्चों के सामने मोबाइल के इस्तेमाल से बचें - फोटो : Freepik.com
बच्चे के सामने मोबाइल चलाने से बचें माता-पिता
 
नॉर्वे में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि जब माता-पिता फोन में व्यस्त होते हैं तो बच्चे के साथ बातचीत के मौके अपने आप कम हो जाते हैं। बच्चे का स्वभाव जिज्ञासू होता है, पर मम्मी-पापा के मोबाइल में बिजी रहने से बच्चों के सवालों का जवाब छोटा हो जाता है, बच्चा भी किताब पढ़ने की जगह मोबाइल चलाने की आदत बनाने लगता है।

इससे दिनभर की छोटी-छोटी बातचीत भी कम हो सकती है। जबकि इन्हीं बातचीत के दौरान बच्चा नए शब्द सुनता है, उनके अर्थ समझता है और भाषा का इस्तेमाल करना सीखता है।

अध्ययन में सामने आया कि जिन पांच साल के बच्चों के पास स्मार्टफोन या टैबलेट था, उनकी भाषा क्षमता शुरुआत में काफी कम रही। दूसरी ओर, जिन माता-पिता का फोन इस्तेमाल ज्यादा था, उनके बच्चों में शब्दावली के विकास की गति भी काफी धीमी पाई गई।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन और टैबलेट ध्यान भटकाने वाले उपकरण हैं। इनका बार-बार इस्तेमाल माता-पिता का ध्यान बच्चों से हटा सकता है। इसका सीधा असर यह हो सकता है कि माता-पिता बच्चों से कम बातचीत करते हैं और जिन शब्दों को बच्चों को समय रहते सीख जाना चाहिए, उसे समझने और बोलने में ज्यादा वक्त लगाते हैं।

बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक - फोटो : Freepik.com
फोन डाल सकता है बच्चों के सीखने की क्षमता पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के शुरुआती वर्षों में माता-पिता और घर वालों की उनसे बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता के साथ बातचीत कम होने से बच्चे नए शब्द सीखने और अपनी भाषा विकसित करने के जरूरी मौकों से वंचित हो सकते हैं। 
 
  • दिमाग का करीब 90 प्रतिशत विकास पांच साल की उम्र तक हो जाता है। 
  • इसलिए शुरुआती वर्षों में बच्चे को बातचीत, कहानी सुनने, सवाल-जवाब और माता-पिता का पूरा ध्यान मिलना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • इस साल की शुरुआत में इंग्लैंड सरकार ने चेतावनी भी दी थी कि बहुत ज्यादा टीवी देखने से छोटे बच्चों की बोलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • माता-पिता को सलाह दी गई थी कि दो से पांच साल की उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम दिन में एक घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

अध्ययन में क्या पता चला?

जामा पिडियाट्रिक में प्रकाशित इस हालिया अध्ययन में  नॉर्वे के 747 बच्चों को शामिल किया गया और बच्चों को पांच साल की उम्र से लेकर उनके आठवें जन्मदिन तक फॉलो किया गया।

अध्ययन की शुरुआत में माता-पिता से पूछा गया कि उनका बच्चा औसतन रोज कितने घंटे स्क्रीन देखता है, क्या बच्चे के पास अपना टैबलेट या स्मार्टफोन है? उनके खुद के सोशल मीडिया इस्तेमाल के बारे में भी सवाल किए गए। माता-पिता को अपने फोन में दर्ज स्क्रीन टाइम की जानकारी शोधकर्ताओं को देने के लिए कहा गया, ताकि उनके फोन इस्तेमाल का वास्तविक समय पता चल सके।
इसके आधार पर बच्चों की भाषा क्षमता को भी नियमित रूप से जांचा गया।
 
  • नॉर्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ ओस्लो के शोधकर्ताओं ने पाया कि माता-पिता का ज्यादा फोन इस्तेमाल बच्चों में शब्दों को समझने और इस्तेमाल करने की क्षमता के विकास को धीमा करने का कारण बन सकता है।
  • जिन बच्चों के माता-पिता रोजाना करीब चार घंटे फोन में व्यस्त रहते थे, उनके भाषा टेस्ट के स्कोर उन बच्चों की तुलना में लगभग 2.5 अंक कम थे, जिनके माता-पिता करीब एक घंटे फोन इस्तेमाल करते थे।
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बच्चों के दिमागी विकास पर असर - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. जुनयी यांग कहती हैं,  परिवार में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल ऐसी महत्वपूर्ण गतिविधियों की जगह ले सकता है, जो बच्चों की भाषा विकसित करने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, मिलकर किताब पढ़ना, बच्चों को कहानी सुनाना और उनके साथ बातचीत करना बच्चे को नए शब्द सीखने के बेहतर अवसर देते हैं।

दो साल की उम्र में सबसे ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चे (करीब पांच घंटे रोज) उन बच्चों की तुलना में काफी कम शब्द बोल पाते थे जो दिन में एक घंटे से भी कम समय स्क्रीन देखते थे।

परिवार में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल होने का मतलब यह भी हो सकता है कि घर में माता-पिता और बच्चों के बीच  बातचीत का समय कम हो रहा है। औसतन माता-पिता जितना ज्यादा समय फोन पर बिताते थे, बच्चे भी उतना ही ज्यादा स्क्रीन देखते थे।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि छोटे बच्चों में स्क्रीन का इस्तेमाल अब लगभग हर जगह सामान्य हो चुका है। करीब 98 प्रतिशत दो साल के बच्चे रोजाना स्क्रीन देखते हैं। ये बच्चों को बौद्धिक विकास के लिए ठीक नहीं है।




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स्रोत:
Parental Technology Use in a Child’s Presence and Health and Development in the Early Years A Systematic Review and Meta-Analysis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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