फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Explainer: मुंह में छाले जैसा घाव निकला कैंसर, काटनी पड़ी जीभ; मौत के मुंह से लौटी नर्स की कहनी कर देगी हैरान

Mon, 29 Jun 2026 08:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धूम्रपान और शराब, कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले सबसे बड़े कारक हैं। नर्स रेचल न धूम्रपान करती थीं, न शराब पीती थीं फिर भी उन्हें स्टेज-2 कैंसर का शिकार पाया गया। जीभ पर निकला एक लाल दाग कैसे कैंसर में बदल गया, ये मामला सभी को हैरान कर देने वाला है।
Register For Event
विज्ञापन
जीभ का कैंसर, हैरान कर देगी ये कहानी - फोटो : Amarujala.com/AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हमारा शरीर खुद बताता है कि अंदर सबकुछ ठीक है या नहीं, बस जरूरत होती है समय रहते उन संकेतों को पहचानने की। कई बार हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई बेहद छोटे से संकेत से शुरू होती है। आमतौर पर जीभ या मुंह के भीतर लालिमा-दर्द को सामान्य छाला मान लिया जाता है और कुछ दिनों में ये अपने आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन क्या आप भरोसा करेंगे कि ऐसे लक्षण कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं? फ्लोरिडा की रहने वाली 42 वर्षीय रेचल पासरेला की कहानी इसी सवाल का जवाब है।

विज्ञापन


रेचल पेशे से नर्स हैं, इस पेशे में आमतौर पर शरीर के संकेतों को समझने की अच्छी जानकारी होती है। जब उनकी जीभ पर एक लाल दाग-घाव दिखाई दिया, तो उन्होंने भी शुरुआत में इसे तनाव और मुंह के सामान्य छाले का असर समझा। लेकिन समय बीतने के साथ दर्द बढ़ता गया, खाना-पीना मुश्किल होने लगा।

उन्होंने डॉक्टर को अपनी समस्या बताई पर उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि जब समस्या लगातार बढ़ती गई और इसकी जांच की गई तो सामने आई रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए। उन्हें स्टेज-2 जीभ का कैंसर था।
विज्ञापन


आज रेचल की जीभ की लगभग 40% हिस्सा निकाल दिया गया है। मौत के मुंह से वापस लौटी रेचल कहती हैं, काश समय रहते समस्या का पता चल गया होता तो हालात इतने न बिगड़ते। जीभ काटकर निकालने के बाद अब वह पहले की तरह खाना नहीं खा पातीं, शब्दों को बोलने में मेहनत करनी पड़ती है। 

मुंह की समस्याओं को न करें अनदेखा (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
पहले पूरा मामला जान लीजिए

42 वर्षीय रेचल पासरेला का सितंबर 2025 में रिश्ता टूट गया। इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से बुरी तरह झकझोर दिया। लगातार तनाव का असर उनके शरीर पर भी दिखाई देने लगा। वह हर समय थकी-थकी महसूस करती थीं। हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें रोज 12 से 14 घंटे तक सोना पड़ता था, फिर भी शरीर में ऊर्जा नहीं रहती थी। उनके बाल तेजी से झड़ने लगे। इसी दौरान उन्हें अपनी जीभ पर एक छोटा-सा लाल रंग का दाग या उभरा हुआ निशान देखा।

 
  • रेचल को लगा कि यह सामान्य माउथ अल्सर (छाला) है। लेकिन तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी जीभ पर बना वह लाल निशान ठीक नहीं हुआ। उल्टा वह पहले से बड़ा होता गया और उसमें दर्द भी बढ़ने लगा।
  • अगले छह महीनों के दौरान रेचल ने चार अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाया पर सभी ने इसे मुंह का इंफेक्शन मानकर नजरअंदाज कर दिया।
  • इस बीच उनकी जीभ पर बना घाव लगातार बढ़ता गया। वह ठीक से चबा भी नहीं पाती थीं, इससे उनका वजन तेजी से कम होने लगा। अब उन्हें महसूस हो रहा था कि मामला सामान्य नहीं है। लिहाजा उन्होंने घाव की बायोप्सी कराई। 

इस रिपोर्ट ने सबकुछ बदल कर रख दिया। पता चला कि उन्हें स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है। आसान भाषा में समझें तो यह जीभ की ऊपरी सतह की कोशिकाओं से शुरू होने वाला एक प्रकार का कैंसर था। उनका कैंसर स्टेज-2 तक पहुंच चुका था, यानी बीमारी काफी बढ़ चुकी थी।

कैंसर हटाने के लिए सर्जरी - फोटो : Freepik.com
कैंसर की वजह से काटनी पड़ी जीभ

हैरानी की बात ये थी कि रेचल न सिगरेट पीती थी, न शराब। नर्स होने के कारण उन्हें स्वास्थ्य की जानकारी अच्छी थी, इसलिए वह चीनी भी बहुत कम खाती थी। फिर भी कैंसर होना उन्हें और डॉक्टरों, दोनों को हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा, ये वास्तव में डराने वाला था। पर मैंने ये ठान लिया था कि ये मेरी जिंदगी का अंत नहीं है।
 
  • रेचल की जिंदगी कैंसर के बाद पूरी तरह बदल गई। इलाज के दौरान उन्हें कई बड़े ऑपरेशन करवाने पड़े, जिनका असर आज भी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देता है।
  • डॉक्टरों ने उनकी दो बार आंशिक रूप से ग्लॉसेक्टॉमी की। इसमें कैंसर को निकालने के लिए जीभ का प्रभावित हिस्सा (करीब 39%) सर्जरी करके काटकर हटा दिया जाता है।
  • इसके अलावा उनकी नेक डिसेक्शन भी की गई। इसमें गर्दन के उन लिम्फ नोड्स को निकाल दिया जाता है जहां कैंसर फैलने की आशंका होती है।

अब उन्हें रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी बहुत परेशानी होती है। खाना चबाना, निगलना और स्वाद महसूस करना पहले जैसा बिल्कुल नहीं रहा।
विज्ञापन

मुंह में होने वाली दिक्कतों को न लें हल्के में - फोटो : Freepik.com
रेचल कहती हैं, अगर शुरुआती दिनों में ही लक्षणों की सही से पहचान हो गई होती तो शायद ये नौबत न आती। मेरी जीभ बची रह जाती और मैं कम से कम अपनी पसंदीदा चीजें खा पाती, सही से बोल पाती।

वह कहती हैं, सभी लोगों के लिए ये सीख है कि शरीर में कुछ भी असामान्य लगे तो उसे हल्के में न लें। देर की तो स्थिति बिगड़ सकती है। कैंसर के मामलों में ऐसा ज्यादा देखा जाता है, शुरुआत में लोग इसके संकेतों को आम समस्या मानते रहते हैं और देखते ही देखते हालत बिगड़ने लगती है।


जीभ का कैंसर, कैसे पहचानें?

अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, जीभ का कैंसर अमेरिका में होने वाले सभी नए कैंसर मामलों का लगभग 1 प्रतिशत है। साल 2023 में अमेरिका में करीब 18,040 लोगों में जीभ के कैंसर की पुष्टि हुई। दुनियाभर में इसके करीब 1.50 लाख मामले सामने आते हैं। 
 
  • अधिकांश मामलों में यह कैंसर जीभ की ऊपरी सतह पर मौजूद स्क्वैमस कोशिकाओं में शुरू होता है।
  • डॉक्टरों के अनुसार आमतौर पर जीभ या मुंह के कैंसर का खतरा उन लोगों में अधिक देखा जाता है जो लंबे समय तक तंबाकू-सिगरेट या शराब का सेवन करते हैं। 
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण भी इसका खतरा बढ़ जाता है।

लेकिन रेचल कहती हैं, मुझमें इनमें से कोई भी जोखिम वाला कारण नहीं था। मैं न धूम्रपान करती थी, न शराब पीती थी और मुझे एचपीवी संक्रमण भी नहीं था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपके जीभ पर लगातार घाव-अल्सर रहता हो जो दो हफ्ते में ठीक न हो, जीभ से बिना किसी वजह के खून आता हो, जीभ या जबड़े में लगातार दर्द, निगलने में परेशानी, या गले में गांठ जैसा महसूस होता है तो इसे हल्के में न लें और तुरंत जांच कराएं।



--------------
स्रोत:
Doctors dismissed small, red spot in my mouth now I've lost nearly HALF of my tongue 


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें