फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झारखंड: कार्बन बाजार से बदलेगी किसानों की तकदीर, जलवायु संरक्षण के साथ बढ़ेगी ग्रामीण आय

Fri, 30 Oct 2026 08:52 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड में जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि वानिकी और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए रांची में हितधारक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कार्बन बाजार और कार्बन वित्त की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
Register For Event
विज्ञापन
रांची में हितधारक कार्यशाला आयोजित की गई। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने रांची में 'जलवायु के प्रति लचीला झारखंड बनाने के लिए कार्बन बाजार का लाभ उठाना' विषय पर हितधारक कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य में जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि वानिकी और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना था। इसमें कार्बन वित्त की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कार्बन ट्रेडिंग को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका संवर्धन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने उद्योग, खनन और ऊर्जा सहित सभी विभागों के बीच समन्वय पर बल दिया। संजीव कुमार ने झारखंड में 69 फीसदी भूमि क्षरण की चुनौती का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण, वृक्षारोपण और बायोगैस जैसे उपायों पर जोर दिया।

पीसीसीएफ रवि रंजन ने सामुदायिक आजीविका को प्राथमिकता देने और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित कार्बन परियोजनाओं के विकास की बात कही। नाबार्ड के डीजीएम राकेश सिन्हा ने नाबार्ड की योजनाओं के माध्यम से किसानों तक कार्बन वित्त पहुंचाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। पूर्व पीसीसीएफ डॉ. एच.एस. गुप्ता ने कार्बन बाजार को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण बताया। पीसीसीएफ ए.टी. मिश्रा ने आर्द्रभूमि संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन में इसकी भूमिका रेखांकित की।

कार्यशाला में प्रमुख चर्चाएं
विज्ञापन

कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और जलवायु विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें नाबार्ड, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और हिंडाल्को जैसे प्रमुख संगठन शामिल थे। झारखंड की जलवायु संवेदनशीलता को देखते हुए कृषि वानिकी और भूमि पुनर्स्थापन पर चर्चा हुई। ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से कार्बन वित्त जुटाकर किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने पर विचार किया गया।

ये भी पढ़ें- सर्राफा: चांदी ₹8300 टूटकर 11 महीने के निचले स्तर पर; सोना भी कमजोर; क्या ये धनतेस से पहले खरीदारी का मौका?
विज्ञापन
विज्ञापन


अध्ययन और भविष्य की संभावनाएं
क्लाइमटेक्स ने व्यवहार्यता अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। जैवभार और मृदा में कार्बन भंडार के आकलन के लिए डिजिटल मापन उपकरण का प्रदर्शन किया गया। 'झारखंड के लिए जलवायु जोखिम मानचित्रण' (Climate Hazard Mapping for Jharkhand) रिपोर्ट का भी विमोचन हुआ। तकनीकी सत्रों में सरकारी योजनाओं को कार्बन बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई। कार्बन वित्त से ग्रामीण आय में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें