कट्टरपंथ के गढ़ दक्षिण कश्मीर से निकला व्हाइट कॉलर आतंकवाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है। अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठनों ने इस मॉड्यूल को तैयार किया है। इस मॉड्यूल में पकड़े और मारे गए चार डॉक्टर दक्षिण कश्मीर से ही तालुक रखते हैं।
जाकिर राशिद भट्ट उर्फ मूसा
बीटेक की पढ़ाई की थी। गजवत उल हिंद का चीफ था। ए डबल प्लस श्रेणी का आतंकी था।
खुर्शीद अहमद मलिक
इंजीनियरिंग स्नातक से आतंकवादी बना था। पुलवामा का रहने वाला था। श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी कटड़ा से बीटेक किया था। अगस्त 2018 में मारा गया था।
मोहम्मद रफी भट
मोहम्मद रफी भट कश्मीर विश्वविद्यालय का असिस्टेंट प्रोफेसर था। फिर आतंकी बना। मई 2018 में शोपियां जिले में हुई मुठभेड़ में मारा गया था।
जुबैर अहमद वानी
एमफिल स्कॉलर था। दक्षिणी कश्मीर के दहरुना गांव का रहने वाला था। मुठभेड़ में मारा गया था। 2021 में मारा गया।
मन्नान बशीर वानी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रिसर्च स्कॉलर था। बुरहान वानी के मारे जाने के बाद वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा और कमांडर बना था। 2018 में मारा गया।
रियाज नायकू
गतिण का शिक्षक था। बुरहान वानी और आतंकी कमांडर सद्दाम की मौत के बाद रियाज एक चर्चित आतंकवादी बन गया। 2020 में मुठभेड़ में मारा गया।
जुनैद अशरफ सेहरई
एमबीए किया था। इसके बाद हिजबुल के साथ जुड़ गया था। वो तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सेहरई का बेटा था। 2020 में मारा गया।
दक्षिम कश्मीर कट्टरपंथता का गढ़
पढ़े लिखे लोग पहले भी आतंकवादी बनते थे और आज भी बन रहे हैं। अमेरिका में 9/11 का हमला करने वाले आतंकी पढ़े लिखे थे। डॉक्टरों के आतंकी माड्यूल में पकड़े गए चार डॉक्टर दक्षिण कश्मीर के रहने वाले हैं। दक्षिण कश्मीर जमात-ए-इस्लामी का गढ़ है। इस संगठन की विचारधारा देश विरोधी है। पाकिस्तान ने 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर में पीढ़ीगत कट्टरपंथता शुरू की थी। यह पिछले सात-आठ दशकों तक चलती रही। 1990 में पीढ़ीगत कट्टरपंथता चरम पर थी। पिछले कुछ साल से विकास कार्य और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई से इसमें कमी आई। पहलगाम हमले के बाद कश्मीरी आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर उतरे तो इसमें कमी आई लेकिन पीढ़ीगत कट्टरपंथता जारी रही। आईएसएआई और जमात-ए-इस्लामी ने इसी का लाभ उठाते हुए कट्टरपंथता का गढ़ रहे दक्षिण कश्मीर से ऐसे लोगों को चुना जिनका पहले का कोई आतंकी रिकॉर्ड न हो जिसका हिस्सा यह डॉक्टर बने।