राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) को परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एनएचएलएमएल ने तकनीकी सलाहकारों से डीपीआर बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। परियोजनाओं में सोनमर्ग से थजिवास ग्लेशियर तक 2.13 किलोमीटर, बालटाल से श्री अमरनाथ गुफा तक 11.6 किलोमीटर, नाशरी टनल से सनासर तक 2.97 किलोमीटर, भद्रवाह से सियोजधार तक 8.8 किलोमीटर, दूधपत्थरी (परिहास से डिस्खल) तक 2 किलोमीटर, अमरनाथ बेस प्वाइंट पहलगाम से चंदनवाड़ी तक 14 किलोमीटर और चंदनवाड़ी से पवित्र श्री अमरनाथ गुफा तक 23 किलोमीटर रोपवे शामिल हैं।
तकनीकी सलाहकारों की नियुक्ति के बाद डीपीआर को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसी के साथ परियोजनाओं की वास्तविक लागत, अलाइनमेंट व अन्य तकनीकी पहलुओं का प्रारूप भी तय होगा। खास तौर पर बालटाल और पहलगाम मार्ग पर प्रस्तावित रोपवे से अमरनाथ यात्रा और सुगम हो जाएगी। इससे हर उम्र के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा आसान होगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भद्रवाह, सोनमर्ग और दूधपत्थरी जैसे प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
पटनीटॉप-सनासर का पर्यटन नेटवर्क होगा मजबूत
नाशरी टनल-सनासर रोपवे से पत्नीटॉप और सनासर के बीच नया पर्यटन नेटवर्क विकसित होने की उम्मीद है। यह दोनों हिल रिजॉर्ट को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। 2024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पटनीटॉप जम्मू का प्रमुख हिल स्टेशन है। यह देवदार और काइल के घने जंगलों से घिरा है। यहां के मैदान, शांत पगडंडियां, पिकनिक स्थल और चिनाब बेसिन व पीर पंजाल पर्वतमाला के नजारे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां स्थित नाग मंदिर का भी महत्व है। सर्दियों में बर्फ से ढकी ढलानों पर स्कीइंग और स्लेजिंग जैसी गतिविधियां होती हैं। वहीं, 2079 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सनासर को मिनी गुलमर्ग भी कहा जाता है।
देवदार के विशाल पेड़ों से घिरा कप आकार का मैदान यहां का प्रमुख आकर्षण है। यहां गोल्फ, पैराग्लाइडिंग, घुड़सवारी और ट्रेकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नत्था टॉप से आसपास की चोटियों और घाटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं। रोपवे से पर्यटक आसानी से पत्नीटॉप से सनासर पहुंच सकेंगे। इससे पर्यटन के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सियोजधार से कैलाश कुंड और कठुआ-उधमपुर की वादियों तक खुलेगा नया पर्यटन मार्ग
द्रवाह से सियोजधार तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना धार्मिक आस्था के साथ साहसिक और प्राकृतिक पर्यटन को भी नई दिशा देगी। यह क्षेत्र भद्रवाह को उधमपुर के डुडू और कठुआ की बनी उपमंडल की वादियों से जोड़ने वाले नए पर्यटन मार्ग के रूप में विकसित हो सकता है।
भद्रवाह से शुरू होने वाली कैलाश कुंड यात्रा तीन दिवसीय धार्मिक यात्रा है, जो वासुकी नाग देवता को समर्पित है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। यात्रा गाथा गांव स्थित वासुकी नाग मंदिर से शुरू होकर सियोजधार के घास के मैदानों से होते हुए कैलाश कुंड तक पहुंचती है। करीब 12,887 फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलाश कुंड झील तक का ट्रेक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव है। रोपवे परियोजना के पूरा होने से भद्रवाह और सियोजधार के साथ आसपास के क्षेत्रों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होने की उम्मीद है। इससे ट्रेकिंग, कैंपिंग और प्रकृति पर्यटन के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सोनमर्ग और दूधपत्थरी भी रोपवे नेटवर्क से जुड़ेंगे
सोनमर्ग से थजिवास ग्लेशियर और दूधपत्थरी क्षेत्र के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं कश्मीर के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी देंगी। इससे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही आसान होने के साथ पर्यटन सीजन को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में विकास परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर में न केवल बुनियादी ढांचे को बेहतर कर रही हैं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों को भी समृद्ध करने की दिशा में काम कर रही हैं। रोपवे के विस्तार से बाबा बर्फानी की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सहूलियत मिलेगी। जम्मू संभाग के कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को वैकल्पिक रूट और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन का विस्तार होगा। -डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री