पहले भी हो चुका हमला
सीमा से सटे कठुआ और सांबा के रास्ते आतंकी गतिविधियों और घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रही हैं। जून 2024 में हीरानगर में आतंकी वारदात के बाद जुलाई में कठुआ में सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हमले में पांच जवान बलिदान हुए। उसी दौर में कठुआ में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी।
जंगलों के रास्ते जम्मू तक पहुंचने की आशंका
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण पहलू आतंकियों का संभावित मूवमेंट रूट है। कठुआ सेक्टर से घुसपैठ की स्थिति में आतंकियों के बसोहली, बिलावर और बनी के जंगलों की ओर जाने की आशंका जताई गई है। ये इलाके पहाड़ी और जंगलों से घिरे हैं, जिससे घुसपैठ के बाद आतंकियों के लंबे समय तक छिपकर आगे बढ़ने की आशंका रहती है। घुसपैठ अगर सांबा सेक्टर से होती है तो आतंकियों के डुडू, बसंतगढ़, रामनगर और लट्टी की ओर जाने की आशंका है। यह रूट सीमा से अंदरूनी पहाड़ी इलाकों की तरफ जाने का रास्ता देता है। इसके बाद आतंकियों के जम्मू की ओर बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।
अगस्त में कठुआ के जंगलों में भी चला था सर्च ऑपरेशन
वर्तमान इनपुट को हाल की सुरक्षा गतिविधियों से जोड़कर देखें तो खतरे की तस्वीर और स्पष्ट होती है। अगस्त 2026 में उधमपुर, रियासी और कठुआ के कई हिस्सों में संदिग्ध लोगों की गतिविधि की सूचना पर सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान चलाए थे। 20 अगस्त को कठुआ के जंगलों में स्थानीय लोगों की सूचना के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया था। बात सांबा की करें तो 27 अगस्त को सुंब इलाके में वायरलेस और सैटेलाइट कम्युनिकेशन गतिविधि मिलने के बाद भी संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया था।
सुरक्षा प्रतिष्ठान और एनएच-44 भी संभावित निशाने पर
इनपुट के अनुसार आतंकियों के संभावित निशानों में जम्मू के सुरक्षा बलों के कैंप और भीड़भाड़ वाले स्थान शामिल हैं। इसके साथ ही कठुआ-सांबा-जम्मू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के आसपास भी हमले की आशंका जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार खतरा केवल सीमा या जंगलों तक सीमित नहीं माना जा रहा। घुसपैठ के बाद आतंकियों के आबादी वाले इलाकों और महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग तक पहुंचने की आशंका है। इसी के मद्देनजर सुरक्षा बलों को अलर्ट करते हुए फील्ड फॉर्मेशन को निवारक तथा एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा क्षेत्र से लेकर जंगलों और जम्मू की ओर आने वाले संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के साथ सुरक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है।