जेल परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में औचक जांच करने तथा जब्त किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की उपराज्यपाल ने फोरेंसिक जांच कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जेलों के भीतर प्रिजन इंटेलिजेंस यूनिट गठित करने, सभी जेलों में बायोमीट्रिक प्रणाली लागू करने और कैदियों के लिए टेलीमेडिसिन सुविधाओं का विस्तार करने पर भी चर्चा हुई। जेल विभाग में मानव संसाधन मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया। उपराज्यपाल ने महानपुर में निर्माणाधीन हाई सिक्योरिटी जेल की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने शेष निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में ये रहे मौजूद
डीजीपी नलिन प्रभात, डीजीपी जेल दीपक कुमार, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव चंद्राकर भारती, स्पेशल डीजी (कोऑर्डिनेशन) एसजेएम गिलानी, एडीजी सीआईडी एमके सिन्हा मौजूद रहे।
प्रदेश में 15 जेलें, कोट भलवाल और श्रीनगर सबसे संवेदनशील
केंद्रशासित प्रदेश में 15 जेलें हैं। इनकी स्वीकृत क्षमता 3,629 बंदियों की है। जम्मू-कश्मीर जेल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अभी 5,300 से अधिक बंदी जेलों में बंद हैं। इनमें जम्मू स्थित कोट भलवाल सेंट्रल जेल अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में है। यहां आतंकवाद से जुड़े स्थानीय और पाकिस्तानी बंदियों को रखा गया है। जेल के भीतर मोबाइल फोन और प्रतिबंधित सामग्री मिलने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यहां आतंकियों के बीच अवैध संपर्क और नेटवर्क की आशंका बनी रहती है। इसी प्रकार सेंट्रल जेल श्रीनगर भी अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में है। वहां आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े मामलों के बंदियों व कैदियों की मौजूदगी है। यहां सीआईएसएफ को आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।