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बच्चे को परिवार से ही मिलती है संस्कार, अनुशासन और प्रेम की शिक्षा : सोनिया

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तरोटी में श्रीमद्भागवत कथा में साध्वी ने बताए सनातन धर्म के मूल सिद्धांत
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। गांव तरोटी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथावाचक साध्वी सोनिया शर्मा ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज में कई पंथ, मत और विचारधाराएं सक्रिय हैं लेकिन सनातन धर्म की आधारशिला मानवता, करुणा, सहिष्णुता और कर्तव्यबोध पर टिकी हुई है। यही कारण है कि सनातन परंपरा युगों-युगों से समाज को दिशा देती आई है। साध्वी ने कहा कि आज के आधुनिक जीवन में माता-पिता और संतान के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है। परिवार ही वह प्रथम विद्यालय है जहां बच्चे को संस्कार, अनुशासन और प्रेम की शिक्षा मिलती है। मातृत्व की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि शिशु के जन्म के बाद मां का दूध केवल शारीरिक पोषण का साधन नहीं बल्कि जीवन की पहली आध्यात्मिक और भावनात्मक डोर है। मां के स्पर्श और स्नेह के साथ प्राप्त मातृ-दूध बच्चे के मन में सुरक्षा, अपनत्व और विश्वास की भावना विकसित करता है। उनके अनुसार जिन बच्चों को प्रारंभ से ही मातृ-स्नेह और पोषण प्राप्त होता है उनमें पारिवारिक संबंधों के प्रति अधिक संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित होती है। साध्वी ने समाज की महिलाओं से आह्वान किया कि वे मातृत्व के इस पवित्र कर्तव्य को समझें और नई पीढ़ी को संस्कारित बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। साथ ही पुरुषों से भी आग्रह किया कि वे परिवार में सहयोग, सम्मान और सद्भाव का वातावरण बनाए रखें। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से मंत्रमुग्ध होकर प्रवचन का श्रवण करते रहे। कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा उपस्थित रहे। अंत में विधिवत आरती, भजन-कीर्तन एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर स्थानीय निवासी सुरेंद्र शर्मा, पूर्व सरपंच बचन सिंह तथा गांव के लोग उपस्थित रहे।
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