बदलते मौसम के साथ जम्मू शहर से लेकर गांवों तक बिजली की अनियमित कटौती से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। शहर में ही प्रतिदिन चार से पांच घंटे कट से लोग परेशान हैं। जहां व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, वहीं लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र आरएसपुरा, बिश्नाह, रामगढ़, अरनिया, अखनूर, खौड़, सांबा समेत अन्य ग्रामीण इलाकों में भी बुरे हालात हैं। 24 घंटे में मात्र 14 से 15 घंटे ही आपूर्ति हो रही है। बिजली कब आएगी या जाएगी, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अचानक बत्ती गुल होने से काम ठप पड़ रहे हैं। सुबह पानी की टंकी भी नहीं भर पा रही, जिससे न तो पीने को पानी मिल रहा है न ही नहाने के लिए।
प्रशासन के अनुसार नदियों का जलस्तर घटने से बिजली का उत्पादन अचानक कम हो गया है। जम्मू और कश्मीर के लोगों को 24 घंटे आपूर्ति मुहैया कराने के लिए 1600 से ज्यादा मेगावाट बिजली की जरूरत है। वर्तमान 700 से 800 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। इसके चलते आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। इस बारे में चीफ इंजीनियर संदीप सेठ का कहना है कि सुचारू बिजली आपूर्ति की कवायद चल रही है। जल्द ही कटौती से निजात मिल जाएगी।
24 घंटे के दावे खोखले साबित
फत्तू चौहान के व्यापारी दिनेश डोंगरा का कहना है कि बिजली से हाल बुरा हो गया है। सुबह छह से नौ बजे तक कटौती हो रही है। दोपहर से शाम तक कई बार कट लग रहे हैं। इससे व्यापार चौपट हो गया है। मोती बाजार के इलेक्ट्रॉनिक सामान के कारोबारी सौरभ मंगोत्रा का कहना है-सुबह 11 बजे बिजली चली गई जो दोपहर एक बजे तक नहीं आई। इस कारण व्यापार पर असर पड़ रहा है। हनुमान नगर के विक्की वर्मा का कहना है कि सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक बिजली बंद रही। बच्चों को रात में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पक्का डंगा के योगेश वर्मा का कहना है कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। लोड ज्यादा होने से ट्रांसफार्मर जल रहे हैं।