जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी
पिछले डेढ़ दशक में जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की संख्या लगातार बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ऐसे 13,700 से अधिक विदेशी जम्मू और सांबा जिले में बसे हुए हैं। साल 2008 से 2016 के बीच करीब 6000 रोहिंग्या बढ़ गए हैं।
जानकार बताते हैं कि वर्ष 2009 में रोहिंग्याओं का जम्मू में आना शुरू हुआ। 2012 में इन्हें बठिंडी में रहने की जगह दी गई जिसके बाद से इनकी संख्या लगातार बढ़ी। सरकार ने इन्हें जम्मू से बाहर निकालने के लिए कई प्रयास किए लेकिन खास सफलता नहीं मिली। जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी के मामले भी सामने आए हैं। कश्मीर में ऐसी कई लड़कियों की शादी कराई गई है। चोरी, नशा तस्करी व देह व्यापार में भी रोहिंग्याओं की संलिप्तता सामने आ चुकी है। इस साल 12 जुलाई को रियासी पुलिस ने कटड़ा से फहीम अहमद नाम का बांग्लादेशी पकड़ा था।
निशाने पर बांग्लादेश में पढ़ाई करने वाले कश्मीरी
सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2002 तक पीओके के कई युवा बांग्लादेश स्थित एक ट्रेनिंग कैंप में भर्ती होते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई करने बांग्लादेश जाते हैं। वर्तमान में करीब पांच हजार युवा बांग्लादेश में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग व अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी और बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन ऐसे युवाओं को बरगलाकर आतंक बनाने का प्रयास करते हैं।