- गुमनाम शिकायतों के आधार पर आदेश पर उठे सवाल, कर्मचारी ने स्वास्थ्य कारण भी गिनाए
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने समाज कल्याण विभाग की एक महिला कर्मचारी को फिर से रामबन भेजने वाले तबादला आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सात माह के भीतर दो बार तबादला और वह भी बिना कोई कारण बताए प्रशासनिक फैसले पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विभाग को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में कर्मचारी ने बताया कि उसे पहले मार्च में रामबन भेजा गया था। स्वास्थ्य समस्याओं और लगातार उपचार के चलते उन्होंने विभाग को प्रार्थनापत्र दिया था। उनकी स्थिति देखते हुए विभाग ने तीन अप्रैल को तबादला आदेश वापस ले लिया और उन्हें ओबीसी कल्याण सलाहकार बोर्ड में तैनाती दे दी। कर्मचारी का आरोप है कि विभाग ने उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से पूरी तरह परिचित होने के बावजूद दस नवंबर को फिर वही आदेश जारी कर दिया।
न्यायाधिकरण ने माना कि बिना वजह तबादला करना ठीक नहीं है। खासकर तब जब कर्मचारी ने तय अवधि भी पूरी नहीं की हो। सरकार की ओर से सरकारी वकील ने आदेश को प्रशासनिक हित में बताया लेकिन कोर्ट ने कहा कि आदेश में कारण स्पष्ट नहीं हैं और मामला विस्तृत सुनवाई योग्य है। अगली सुनवाई 26 दिसंबर को होगी। तब तक तबादला आदेश लागू नहीं होगा और कर्मचारी विभाग के सक्षम अधिकारी को अपना विस्तृत प्रार्थनापत्र सौंप सकती है।