- मामला फिर से ट्रायल कोर्ट को भेजा, गुण दोष के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। देरी माफी का आवेदन खारिज करने संबंधी आदेश रद्द करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसे ट्रायल कोर्ट को वापस भेजने का आदेश दिया। साथ ही कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार मुकदमे का निपटारा उसके गुण दोष के आधार पर करने के निर्देश दिए। मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
एचएसएल एंटरप्राइजेज बनाम मैसर्स थर्मेक्स लिमिटेड के वाद में एडिशनल जज जम्मू की कॉमर्शियल कोर्ट ने यह विवादित आदेश जारी किया था। 19 अगस्त, 2025 को पारित इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता एचएसएल एंटरप्राइजेज ने अपील की। विवादित आदेश के जरिये जो असल में एक डिक्री (न्यायिक निर्णय) के बराबर था ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता का मुकदमा समय सीमा से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था। ऐसा करने से पहले कोर्ट ने अपीलकर्ता की ओर से लिमिटेशन एक्ट 1963 की धारा 14 के तहत समय की छूट मांगने वाली अर्जी को खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के इस मुकदमे की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि को समझने में विफल रहने को आधार बनाते हुए फैसले के खिलाफ अर्जी दी थी। प्रतिवादी ने अन्य बातों के साथ-साथ याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए यह तर्क दिया कि यह मामला एक निजी अनुबंध से जुड़ा है। ऐसे में ज्यूडिशियल रिव्यू के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे में अपीलकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली और साथ ही अपने दावे को लागू करने तथा उसके परिणामस्वरूप वसूली करने के लिए दीवानी उपाय अपनाने की अनुमति मांगी। इसके तुरंत बाद एक दीवानी मुकदमा दायर किया गया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कहा कि रिट की कार्यवाही के दौरान अपीलकर्ता ने उचित तत्परता या सद्भावना नहीं दिखाई।
यह है विवाद...
मूल विवाद जम्मू के भगवती नगर में स्थित 30 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए साइट से जुड़े कार्यों से संबंधित है। अपीलकर्ता ने प्रतिवादी के कहने पर ये काम किए थे, कुछ भुगतान के बावजूद 96 लाख की राशि अभी भी बकाया है।