सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की निदेशक ममता यादव ने बताया कि नीति का ड्राफ्ट फिलहाल समीक्षा के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग समीक्षा के दौरान पूछे जा रहे सवालों का लगातार जवाब दे रहा है। उम्मीद जताई कि इस नीति को जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
ममता यादव ने बताया कि किसी भी नई नीति को लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। यह प्रस्तावित नीति मौजूदा ढांचे की उन कमियों को दूर करेगी जो अब तक छूटी हुई थीं। आज के दौर में जनसंपर्क और संचार के क्षेत्र में सोशल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ चुकी है। इसीलिए इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे डिजिटल माध्यमों को भी इस नई नीति का हिस्सा बनाया गया है।
यह कदम जम्मू-कश्मीर विधानसभा के हालिया शरदकालीन सत्र में उठे उस विवाद के बाद सामने आया है, जिसमें जनप्रतिनिधियों ने बिना नियंत्रण वाले सोशल मीडिया न्यूज पोर्टल्स, ऑनलाइन ट्रोलिंग और भ्रामक जानकारियों के प्रसार पर गहरी चिंता जताई थी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक बशीर अहमद शाह वीरी ने जनप्रतिनिधियों पर होने वाले ऑनलाइन हमलों और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कानून की मांग की थी। सत्र में कई विधायकों ने नियामक ढांचे की वकालत की तो कुछ ने यह चेतावनी भी दी कि नए नियम प्रेस की आजादी को प्रभावित करने वाले नहीं होने चाहिए।
इस पर जवाब देते हुए शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने 30 सितंबर 2026 को विधानसभा को बताया था कि सरकार एक नई नीति पर काम कर रही है। सूचना विभाग को इसके दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए चार महीने की मोहलत दी गई है।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया था कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग के लिए सिर्फ मीडिया को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, इसमें राजनीतिक लोग भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाली सामग्री की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर विशेष जोर दिया।