कघोट में हुए बस हादसे में घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाते हुए राहत कर्मी।
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उधमपुर। बस हादसे में घायलों को जीएमसी उधमपुर लाया गया तो हर ओर गम के बीच अपनों को खोने का माहाैल था। हर तरफ अफरा-तफरी नजर आ रही थी। जैसे ही एंबुलेंस के सायरन की आवाज दूर से सुनाई देती तो अस्पताल के बाहर जमा भीड़ की धड़कनें तेज हो जातीं। हर कोई एंबुलेंस की ओर इस उम्मीद और डर के साथ दौड़ता कि कहीं स्ट्रेचर पर उसका अपना तो नहीं। पुलिस की सीटियां और रास्ता साफ करने के निर्देश उस शोर और रुदन के बीच धुंधले पड़ रहे थे।
जब घायलों को वाहनों से उतारा गया तो दृश्य रूह कंपा देने वाला था। किसी का शरीर खून से लथपथ था तो कोई मिट्टी में लिपटे बदन के कारण पहचान में भी नहीं आ रहा था। इमरजेंसी वार्ड के बाहर का नजारा सबसे दर्दनाक था। वहां कोई बच्चा अपनी मां के आंचल के लिए बिलख रहा था तो कोई बूढ़ा पिता अपने जवान बेटे के बेजान शरीर को देखकर पत्थर सा हो गया था। कहीं पत्नियों का सुहाग उजड़ने का विलाप गूंज रहा था तो कहीं बहनें अपने भाई की सलामती के लिए दुआएं मांग रही थीं।
हर बीतता मिनट उनके लिए घंटों जैसा भारी
अस्पताल के गलियारों में केवल सायरन और चीखें नहीं थीं बल्कि वहां एक भारी सन्नाटा भी था। उन लोगों का जो अपनों की जानकारी के लिए भटक रहे थे। सूचना केंद्र के अभाव में लोग एक वार्ड से दूसरे वार्ड भाग रहे थे। हर बीतता मिनट उनके लिए घंटों जैसा भारी था। कई लोग इस सच्चाई को मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे कि जो सुबह घर से हंसते हुए निकला था वह अब इस दुनिया में नहीं रहा
घायलों को इमरजेंसी तक पहुंचाते नजर आए पुलिस अधिकारी
डाॅक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक सभी अपने स्तर पर पूरा प्रयास करते नजर आए ताकि इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहे। सेना की ओर से भी इमरजेंसी मेडिकल टीम अस्पताल पहुंची थी। पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और वे घायलाें को एंबुलेंस से लेकर स्ट्रेचर और इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाते नजर आए। पीड़ितों के परिजन को पुलिस कर्मी हौसला बढ़ाते नजर आए। विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया, भाजपा के अध्यक्ष अरुण गुप्ता, वरिष्ठ नेता पवन खजुरिया ने भी घायलों का हाल जाना।