उधमपुर। देश की आजादी के कुछ ही वर्षों बाद साल 1951 में स्थापित सरकारी मिडिल स्कूल बाड़यां आज बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सात दशक पुरानी इमारत खंडहर बन चुकी है, जो शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। विडंबना यह है कि प्रशासन की ओर से इमारत को असुरक्षित घोषित करने के बावजूद अब तक स्कूल संचालित किया जा रहा है जिससे हर वक्त हादसे का डर बना रहता है।
स्कूल में प्राइमरी और किंडरगार्टन कक्षाओं के संचालन के लिए कम से कम आठ कमरों की आवश्यकता है लेकिन हालात इसके उलट है। पिछले सत्र में 75 छात्र-छात्राएं नामांकित थे और बुधवार से नया सत्र शुरू होने जा रहा है। दीवारों में दरारें और बारिश के दौरान छतों से टपकता पानी जर्जर स्थिति की गवाही दे रहे हैं। 10 शिक्षकों के स्टाफ वाले स्कूल में हालात इतने खराब हैं कि बच्चों के बैठने के लिए सुरक्षित जगह तो दूर स्टाफ रूम तक नहीं है।
इंजीनियरों की रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई सिफर
पिछले वर्ष अक्टूबर में विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया था। टीम ने दो क्लास रूम, स्टोर और स्टाफ रूम को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर बंद करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में जिन दो पक्के कमरों में कक्षाएं लग रही हैं उनकी स्थिति भी इतनी नाजुक है कि बारिश में वहां बैठना मुमकिन नहीं होता। किंडरगार्टन ब्लॉक भी बढ़ती छात्र संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं है।
हादसे का इंतजार न करे विभाग
स्थानीय अश्विन कुमार का कहना है कि शिक्षा विभाग को तुरंत नए भवन का निर्माण करना चाहिए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अशोक कुमार के अनुसार असुरक्षित ढांचे को तुरंत गिराना चाहिए ताकि बच्चे खुले में सुरक्षित खेल सकें। बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिलनी चाहिए।
निरीक्षण के बाद पुराने ब्लॉक को बंद कर दिया गया था। फिलहाल कमरों की कमी है जिसे दूर करने की मांग आलाधिकारियों से की गई है।
-अनिता खजुरिया, प्रधानाध्यापिका
इमारत की मरम्मत और पुराने ढांचे को हटाने के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही बजट और मंजूरी मिलेगी, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-रुहानी गुप्ता, जोनल एजुकेशन ऑफिसर, जिब