उधमपुर। नगर परिषद के पशुबाड़े में मवेशियों की दयनीय स्थिति का मुद्दा गरमाने के बाद अब प्रशासन और सामाजिक संगठन आगे आए हैं। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस पशुबाड़े में सफाई, चारे और पानी के अभाव के कारण पशुओं की हालत चिंताजनक हो गई थी। लोगों और पशु प्रेमियों के बढ़ते दबाव के बाद शुक्रवार को सुधार अभियान की शुरुआत की गई।
वीरवार के अंक में अमर उजाला की ओर से उठाए गए मुद्दे के बाद विभिन्न गैर सरकारी संगठनों और पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं के स्वयंसेवक पशुबाड़े पहुंचे। उन्होंने न केवल पशुओं के लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था की बल्कि पूरे परिसर में सफाई अभियान चलाया। समाजसेवियों की सेवा को देखकर नगर परिषद की टीम भी सक्रिय हुई और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने में हाथ बंटाया।
नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सद्दाम हुसैन ने दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तस्करी से बचाकर लाए गए बेसहारा मवेशियों की सुरक्षा और उचित देखभाल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
समाजसेवियों की दोटूक, प्रशासन से नहीं संभल रहा तो हमें सौंपें
जन सहयोग युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक वर्मा, समाजसेवी कमल शर्मा और पवन देव सिंह ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इन बेजुबानों की देखभाल करने में सक्षम नहीं है तो पशुबाड़े का संचालन सामाजिक संस्थाओं को सौंप दिया जाना चाहिए। स्वयंसेवी संस्थाएं अधिक संवेदनशील तरीके से इसका संचालन कर सकती हैं।
जिम्मेदारी के अभाव में जा रही थी पशुओं की जान
उधमपुर पुलिस स्टेशन के समीप स्थित पशुबाड़ा मुख्य रूप से मवेशी तस्करी से छुड़ाए गए पशुओं को रखने के लिए बनाया गया है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि नगर परिषद और पुलिस प्रशासन के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट न होने के कारण देखरेख में निरंतर लापरवाही बरती जा रही थी। उचित प्रबंधन न होने के कारण पूर्व में कई पशु दम भी तोड़ चुके हैं। अभियान से अब उम्मीद जगी है कि इन मवेशियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।