यदि नागरिक सावधानी बरतें और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करें तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम किया जा सकता है। सर्दियाें में प्रदूषण बढ़ जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण है बुखारियों और अन्य गर्मी करने वाले उपकरणों से निकलने वाला धुआं जिसका सर्दियों में उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। बुजुर्ग, बच्चे और सांस संबंधी मरीज घर में रहें, जरूरत पड़ने पर ही निकलें। बाहर निकलें तो मास्क का उपयोग करें। भारी व्यायाम से बचें।
-डॉ. नवीद, चेस्ट स्पेशलिस्ट
विशेषज्ञ बोले- बरतें सावधानी, वरना स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर :
विशेषज्ञों के अनुसार पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे कणों की अधिकता स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। आज (शनिवार) पीएम 2.5 का स्तर 69 दर्ज किया गया है जबकि पीएम 10 का स्तर 107 तक पहुंच गया जिसे स्वास्थ्य के लिए अस्वस्थ माना गया है। इन प्रदूषक कणों की अधिकता शहरवासियों के लिए सांस लेने में परेशानी और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा रही है। एक्यूआई 200 से 300 के बीच हानिकारक माना जाता है। ऐसे समय में लंबे समय तक बाहर रहने या शारीरिक गतिविधि करने से सांस लेने में दिक्कत, थकान और हृदय रोग से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
सांस लेने में दिक्कत, जलन जैसे लक्षण दिखने लगे....लोग परेशान :
स्थानीय लोगों ने भी वायु प्रदूषण के चलते सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, आदि जैसे लक्षणों को लेकर शिकायत की है। मुदस्सिर अहमद के अनुसार आम दिनों में ऐसी कोई दिक्कत नहीं आती है लेकिन सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण बढ़ जाता है जिससे आंखों में जलन होती है और पानी टपकने लगता है। बिलाल अहमद के अनुसार बुजुर्ग बाहर निकलते हैं तो सांस लेने में दिक्कत आती है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों पर रोक, धूल और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर जुर्माना, बुखारियों और अंगीठियों का नियमित उपयोग और वाहनों की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण कुछ उपाय है जिन्हें सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।