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पहलगाम हमले के बाद सरकार से उम्मीद थी लेकिन निराशा हाथ लगी: खारा

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-पर्यटन को लेकर जो सुझाव दिए थे उस पर गौर नहीं किया गया: केसीसीआई
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (खारा) ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए बजट को पर्यटन हितधारकों के लिए निराशाजनक बताया। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह से पहलगाम हमले के बाद पर्यटन क्षेत्र प्रभावित हुआ था उसको लेकर लग रहा था कि हितधारकों को राहत दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
खारा के अध्यक्ष गौहर मकबूल ने कहा कि बजट से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन बदकिस्मती से मुझे यह निराशाजनक लग रहा है। हमारे लिए कुछ भी नहीं है। मुझे उम्मीद थी कि कम से कम सरकार से कुछ मदद मिलेगी क्योंकि सब जानते हैं कि पहलगाम हमले के बाद हमने कितना नुकसान उठाया है। होटल वालों को कितनी परेशानी हुई है। चाहे वह लग्जरी होटल हो या छोटा गेस्ट हाउस सबको नुकसान हुआ है। हमें बहुत उम्मीदें थीं लेकिन बदकिस्मती से यह बहुत निराशाजनक है।
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एक सवाल के जवाब सरकार ने कुछ नई पहल की हैं जिनका मैं सच में स्वागत करता हूं। फिल्म इंडस्ट्री मदद के लिए यहां है और टूरिज्म सेक्टर को फिर से शुरू करने के लिए उन्होंने कुछ और पहल और प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। एक उम्मीद है और हमें उम्मीद है कि हम पुराने आंकड़ों पर वापस आएंगे। मुझे उम्मीद है कि हालात बदलेंगे।
वहीं कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) के अध्यक्ष जावेद अहमद टेंगा ने कहा कि जिस तरह से बजट में गुलमर्ग में एसटीपी, वुलर और मानसबल झीलों में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और होमस्टे के लिए रियायती बियाज की घोषणा की गई हम उसका स्वागत करते हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि केसीसीआई ने मांग की थी कि पर्यटन हितधारकों को पहलगाम हमले के बाद जो नुकसान हुआ था उसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने जो लोन लिए हैं उसमें 5 प्रतिशत ब्याज दर में रियायत दी जाए और पर्यटन का आक्रामक प्रचार के लिए फंडस की भी मांग थी लेकिन मुझे नहीं लगता ऐसा कुछ हुआ।
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कुल मिलकर देखें तो निराशा ही हाथ लगी है: केसीसीआई

श्रीनगर। केसीसीआई अध्यक्ष जावेद टेंगा ने कहा कि करीब 7 लाख लोग कश्मीर में हैंडीक्राफ्ट से जुड़े हुए हैं। पिछले कई वर्षों से एक्सपोर्ट की बात करें तो उसमें कुछ काम नहीं हो रहा। 2023-24 वित्तीय वर्ष में हमने करीब 1162 करोड़ का एक्सपोर्ट किया जो 2024-25 में यह घटकर 733 करोड़ रह गया। इसको ध्यान में रखते हुए हमने मांग की थी कि हमारे को करीब 50 करोड़ रुपए हैंडीक्राफ्ट्स के प्रचार और उसे बढ़ावा देने के लिए दिए जाएं ताकि हम दुनिया भर की प्रदर्शनियों में भाग ले सकें। अगर वहां एक भी ग्राहक मिल गया तो करीब 1-2 करोड़ का बिजनेस हो गया। लेकिन उसपर गौर नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि हमने कश्मीर से एक्सपोर्ट होने वाली चीजों पर पांच प्रतिशत के इंसेंटिव की मांग की थी लेकिन उसपर भी कुछ नहीं हुआ। लेकिन जीआई टैग वाली चीज़ों पर दस प्रतिशत मिल रहा है। हम मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि उसपर गौर किया जाए। टेंगा ने यह भी कहा कि श्रीनगर के शहर-ए-खास में पार्किंग व् अन्य सुविधाओं को लेकर भी इस बजट में कुछ खास नहीं देखने को मिला। उन्होंने आगे कहा 200 ई-बसों का हम स्वागत करते हैं लेकिन उसे शुरू करने से पहले बस स्टॉप बनाने की जरूरत है। इंडस्ट्रीज को लेकर भी कुछ खास नहीं है। कुल मिलकर देखें तो निराशा ही हाथ लगी है। लेकिन उम्मीद है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसपर दोबारा गौर करके जो खामियां रही हैं उन्हें दूर करेंगे।
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