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US On China-PAK Ties: चीन-पाकिस्तान की जुगलबंदी पर अमेरिका की नजर, बढ़ती करीबी पर रक्षा मंत्रालय ने कही ये बात

Wed, 24 Dec 2025 08:42 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। कहा गया है चीन क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश कर रहा है। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट और क्या-क्या खुलासे हुए हैं।
 
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भारत से रिश्ते स्थिर करना चाहता है चीन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका के रक्षा विभाग की ताजा रिपोर्ट ने चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन न केवल पाकिस्तान के साथ सैन्य साझेदारी को मजबूत कर रहा है, बल्कि वहां स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित करने की संभावना पर भी विचार कर चुका है। यह खुलासा ऐसे समय आया है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं।
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अमेरिकी रक्षा विभाग की कांग्रेस को सौंपी गई वार्षिक रिपोर्ट ‘मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट्स इन्वॉल्विंग द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना 2025’ में कहा गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अतिरिक्त सैन्य ठिकानों की योजना और तैयारी कर रही है। इन ठिकानों का उद्देश्य नौसैनिक और वायु शक्ति का विस्तार करना और जमीनी सुरक्षा बलों को समर्थन देना है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जहां चीन ने सैन्य अड्डा स्थापित करने पर विचार किया है

कई देशों में बेस की संभावनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने पाकिस्तान के अलावा अंगोला, बांग्लादेश, म्यांमार, क्यूबा, इंडोनेशिया, केन्या, मोज़ाम्बिक, नाइजीरिया, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, तंज़ानिया, संयुक्त अरब अमीरात और कुछ द्वीपीय देशों में भी सैन्य पहुंच बढ़ाने की संभावना पर गौर किया है। पीएलए की खास दिलचस्पी मलक्का जलडमरूमध्य, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और अफ्रीका-मध्य पूर्व के रणनीतिक समुद्री मार्गों में बताई गई है, जहां से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।

पाकिस्तान के साथ रक्षा साझेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान को आधुनिक लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में अहम भूमिका निभाई है। इनमें पांचवीं पीढ़ी का एफसी-31, चौथी पीढ़ी का जे-10सी मल्टीरोल फाइटर और चीन-पाकिस्तान संयुक्त रूप से निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान शामिल हैं। मई 2025 तक चीन ने पाकिस्तान को जे-10सी के 20 विमान सौंपे हैं, जो चीन के एकमात्र निर्यातित जे-10सी विमान हैं। इससे पहले 2020 से कुल 36 विमानों के दो ऑर्डर दिए गए थे।

ड्रोन और नौसैनिक ताकत
चीन ने पाकिस्तान सहित कई देशों को स्ट्राइक-क्षम ड्रोन भी उपलब्ध कराए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि काइहोंग और विंग लूंग जैसे मानव रहित हवाई वाहन अल्जीरिया, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, इराक, मोरक्को, म्यांमार, पाकिस्तान, सर्बिया और यूएई को दिए गए हैं। नौसैनिक क्षेत्र में भी चीन अपनी पकड़ बढ़ा रहा है। बांग्लादेश और पाकिस्तान को फ्रिगेट बेचने के अलावा, चीन ने थाईलैंड को गश्ती जहाज या फ्रिगेट खरीदने का प्रस्ताव स्वीकार किया है।
 

अंतरिक्ष में भी चीन-पाक नजदीकी
पेंटागन रिपोर्ट में अंतरिक्ष क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को भी रेखांकित किया गया है। कहा गया है कि 2024 के दौरान चीन ने 50 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ करीब 200 अंतरसरकारी अंतरिक्ष सहयोग समझौते किए। इन समझौतों में पृथ्वी अवलोकन, डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन, उपग्रह विकास, चंद्र मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान शामिल हैं। पाकिस्तान भी चीन के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन से जुड़ा है।

रूस के साथ भी मजबूत तालमेल
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2024 में रूस के साथ अंतरिक्ष सहयोग को और विस्तार देने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिका का मानना है कि चीन इस सहयोग के जरिए खुद को एक सहयोगी अंतरिक्ष शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है और साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नेतृत्व को कमजोर करने की रणनीति अपना रहा है।

अमेरिकी रक्षा विभाग का आकलन है कि आने वाले पांच वर्षों में चीन अपने नौसैनिक निर्यात बाजार का विस्तार करेगा। मौजूदा समय में बांग्लादेश, मलेशिया, पाकिस्तान और थाईलैंड उसके प्रमुख ग्राहक हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि चीन की यह रणनीति केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और वैश्विक शक्ति समीकरणों पर पड़ेगा। इसी कारण चीन-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी पर अमेरिका की नजर और सख्त होती दिख रही है।
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अमेरिका-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी पर कांग्रेस का वार
कांग्रेस ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती आत्मीयता पर गहरी चिंता जताई है। काग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तानी जनरल आसिम मुनीर की प्रशंसा किए जाने को भारत के लिए एक खतरनाक संकेत बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ट्रंप का मुनीर को बेहद सम्मानित जनरल कहना परेशान करने वाला है। रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप ने जून 2025 से अब तक कई बार मुनीर से मुलाकात की और उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल बताया। कांग्रेस का आरोप है कि यह बढ़ती दोस्ती पाकिस्तान को क्लीन चिट देने जैसी है, जबकि पहलगाम आतंकी हमले में उसकी भूमिका के सबूत मौजूद हैं। पार्टी ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार की चुप्पी को निराशाजनक बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
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