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Weather: पश्चिमी विक्षोभ कमजोर, फिर भी उत्तर भारत में मौसम अस्थिर; बारिश-ओलावृष्टि और गर्मी-उमस से हाल बेहाल

Thu, 02 Apr 2026 05:13 AM IST
Shivam Garg अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

उत्तर भारत में मौसम स्थिर नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने के बावजूद राजस्थान, उत्तर-पश्चिम और पहाड़ी इलाकों में हल्की से भारी बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि का खतरा जारी है। गर्मी और उमस से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। जानें मौसम का हाल…
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उत्तर भारत में मौसम अस्थिर - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के बावजूद उत्तर भारत में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। राजस्थान समेत कई इलाकों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां जारी हैं, जबकि मध्य भारत में ओलावृष्टि का खतरा मंडरा रहा है। 

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दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जिससे देशभर में मौसम अस्थिर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के आसपास सक्रिय रहा, जो अब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन इसका प्रभाव अभी खत्म नहीं हुआ है। इसके चलते उत्तर भारत के मौसम में अस्थिरता बनी हुई है।

राजस्थान के आसपास बना ऊपरी हवा का चक्रवात अब उत्तर-पूर्वी राजस्थान की ओर खिसक गया है, जिससे क्षेत्र में मौसम और सक्रिय हो गया है। पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि उत्तर भारत के अन्य पहाड़ी और मैदानी इलाकों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है, लेकिन परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
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पिछले 24 घंटे के दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज...
पिछले 24 घंटों के दौरान असम और मेघालय, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय इलाके, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और तटीय कर्नाटक में बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी गरज के साथ बौछारें देखी गईं।

भीषण गर्मी-उमस से कामकाज की क्षमता हो रही प्रभावित 
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और उमस से रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज की क्षमता का भी बड़ा संकट बनती जा रही है। एनवायर्नमेंटल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार अत्यधिक तापमान और आर्द्रता के चलते लोगों के सुरक्षित रूप से काम और दैनिक गतिविधियां करने के घंटे तेजी से घटे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर पड़ रहा है, जहां कई जगहों पर साल में हजारों घंटे तक सामान्य जीवन असुरक्षित हो गया है। 

वैज्ञानिकों ने 1950 से 2024 तक के लगभग 75 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोध के अनुसार अब लोग दिन के कई हिस्सों में सामान्य कामकाज करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं और यह समस्या समय के साथ तेजी से बढ़ी है। अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी के कारण गतिविधियां सीमित होने के घंटे वयस्कों के लिए पहले की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं। खासतौर पर बुजुर्गों के लिए स्थिति ज्यादा गंभीर है। उनके लिए सालाना असुरक्षित घंटों की संख्या 600 से बढ़कर करीब 900 घंटे तक पहुंच गई है। इसका अर्थ है कि बुजुर्ग साल के तीन महीने से भी अधिक समय तक बाहर सुरक्षित रूप से सामान्य गतिविधियां नहीं कर पाते। हालांकि वैश्विक औसत अपेक्षाकृत कम दिखता है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति बेहद गंभीर है। फारस की खाड़ी, उप-सहारा पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे इलाकों में यह असुरक्षित समय 2,000 से 3,000 घंटे तक पहुंच सकता है। इन क्षेत्रों में गर्मी और नमी का संयुक्त प्रभाव मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक बन जाता है, जिससे सामान्य जीवन लगभग ठप हो जाता है।

35% युवा आबादी प्रभावित
समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। अध्ययन के अनुसार दुनिया के लगभग 35 फीसदी युवा ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां गर्मियों के सबसे गर्म घंटों में सुरक्षित रूप से गतिविधियां करना संभव नहीं होता। वहीं बुजुर्गों के लिए यह आंकड़ा 78 फीसदी है, यानी हर चार में से तीन बुजुर्ग इस संकट से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

जीवनयोग्यता की सीमा पार कर रहे कई इलाके...
शोध में कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक जीवनयोग्यता की सीमा के करीब या उससे आगे बताया गया है। इन इलाकों में तापमान और आर्द्रता का स्तर इतना अधिक हो जाता है कि मानव शरीर स्वाभाविक रूप से खुद को ठंडा नहीं रख पाता। ऐसे में बिना एयर कंडीशनिंग या ठंडे वातावरण के बाहर रहना खतरनाक हो सकता है।
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