पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद टीएमसी में असंतोष खुलकर सामने आया है। कई नेताओं ने नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। इससे पार्टी के भीतर एकजुटता पर दबाव बढ़ सकता है। आइए, खबर में जानते हैं कि किस नेता ने क्या-क्या कहा है और पार्टी ने क्या सफाई दी है...
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को भाजपा से हार का सामना करना पड़ा। इसके 48 घंटे के भीतर ही कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी। नेताओं ने हार के लिए पार्टी की कार्यशैली और फैसलों को जिम्मेदार बताया।
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मनोज तिवारी ने अरूप बिस्वास पर साधा निशाना
पूर्व जूनियर खेल मंत्री मनोज तिवारी ने वरिष्ठ मंत्री अरूप बिस्वास पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत असुरक्षा के कारण विकास कार्यों को रोका गया। तिवारी ने कहा कि वह हावड़ा में एथलेटिक हब बनाना चाहते थे। इसके लिए जमैका के ओलंपियन और स्प्रिंटर योहान ब्लेक को जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि 700 करोड़ रुपये के खेल बजट में इस परियोजना के लिए केवल 5 करोड़ रुपये की जरूरत थी। इसके बावजूद इसे लागू नहीं होने दिया गया।
‘विभाग में कोई अधिकार नहीं मिला’
तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें विभाग में कोई प्रभावी जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें कार्यक्रमों में भी नजरअंदाज किया जाता था। डूरंड कप के दौरान भी उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई थी। उन्होंने साल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेसी से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि ऐसा कुछ हो सकता है। तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन वह अपनी बात ठीक से नहीं रख पाए। उन्होंने कहा कि एक कैबिनेट बैठक में भी उन्हें पूरा समय नहीं मिला।
रीजू दत्ता ने भी जताई नाराजगी
टीएमसी प्रवक्ता रीजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि चार मई को उनके घर पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके फोन का जवाब नहीं दिया। दत्ता ने कहा कि हालात बिगड़ने से रोकने के लिए भाजपा नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, टीएमसी सांसद और अभिनेता देव ने भाजपा को जीत की बधाई दी। उन्होंने नई सरकार से सांस्कृतिक एकता बनाए रखने की अपील की। साथ ही घाटल मास्टर प्लान को पूरा करने के लिए सहयोग की उम्मीद जताई।
अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल
पार्टी के कुछ नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्हें संगठन में केंद्रीकरण के लिए जिम्मेदार बताया गया। टिकट वितरण और चुनावी हार को लेकर भी नाराजगी सामने आई। टीएमसी ने बयान जारी कर कहा कि नेताओं के ये बयान उनके व्यक्तिगत विचार हैं। इन्हें पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।