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'दांतों को हथियार नहीं माना जा सकता': मुंबई की अदालत ने सुनाया अहम फैसला, आरोपी को बरी किया

Sun, 19 Jul 2026 04:08 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

मुंबई की एक स्थानीय अदलात ने मारपीट के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। विवाद के बाद हुई हिंसा में दांतों से काटने को लेकर लगा बड़ी टिप्पणी की है। पढ़ें पूरा मामला...
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(सांकेतिक) - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुंबई की मुलुंड अदालत ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि मानव दांतों को हथियार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने माना कि किसी व्यक्ति द्वारा दांत से काटने की घटना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 324 के दायरे में नहीं आएगी। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि दांत शरीर का स्वाभाविक हिस्सा हैं, न कि ऐसा हथियार जिससे काटकर चोट पहुंचाने के अपराध में धारा 324 लगाई जा सके।

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इस मामले में सुनाया अहम फैसला
अदालत ने शनिवार को अपने आदेश में कहा कि धारा 324 उन मामलों पर लागू होती है, जिनमें चोट किसी धारदार, काटने वाले या खतरनाक हथियार से पहुंचाई गई हो। चाकू, ब्लेड, कैंची, तलवार और हंसिया जैसे औजार काटने के लिए बनाए जाते हैं, जबकि मानव दांत प्रकृति द्वारा भोजन चबाने और खाने के लिए दिए गए हैं। इसलिए दांतों को किसी भी स्थिति में हथियार नहीं माना जा सकता।

यह मामला 31 मार्च 2018 का है। मुंबई के कांजुरमार्ग इलाके में शिकायतकर्ता अपने दोस्तों के साथ पढ़ाई को लेकर चर्चा कर रहा था। आरोप है कि उसी दौरान राहुल घाडी नाम का युवक शराब के नशे में वहां पहुंचा, गाली-गलौज की और मारपीट करते हुए शिकायतकर्ता के कंधे पर चार-पांच बार दांत से काट लिया। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मानव दांत न तो हथियार हैं और न ही कानून की नजर में काटने का ऐसा साधन, जिसके आधार पर आईपीसी की धारा 324 लगाई जा सके। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि मानव दांत शरीर का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें धारदार या काटने वाले हथियार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसलिए आरोपी के खिलाफ धारा 324 के तहत कार्रवाई नहीं बनती।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने भी अदालत को बताया कि वह अब आरोपी के खिलाफ मामला आगे नहीं चलाना चाहता। चूंकि आईपीसी की धारा 323 और धारा 504 के अपराध समझौते योग्य हैं, इसलिए अदालत ने उन धाराओं में भी आरोपी को बरी कर दिया।

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