अगस्त्यमलाई में अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,118 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और केरल में फैले अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य के संरक्षित वन क्षेत्रों में लंबे समय से जारी अतिक्रमण पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध अतिक्रमण हटाओ योजना तैयार कर उसे लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही अतिक्रमण में शामिल पाए गए 118 सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के विशिष्ट निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी किए गए आदेशों के बावजूद अगस्त्यमलाई परिदृश्य के संरक्षित क्षेत्रों में कई दशकों से अतिक्रमण जारी है और बढ़ता ही जा रहा है। इस संरक्षित क्षेत्र में कलाकड़ मुंडनथुरई बाघ अभयारण्य, श्रीविल्लिपुथुर-मेगामलाई बाघ अभयारण्य और कन्याकुमारी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। कोर्ट ने तमिलनाडु में आरक्षित वनों, वन्यजीव अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों के संरक्षण सहित कई मुद्दों को उठाने वाली याचिका पर गत 29 मई को अपना फैसला सुनाया।
फैसले के मुताबिक, केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने जुलाई 2025 की अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य 3,500.36 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें केरल और तमिलनाडु के कई जिले शामिल हैं। जिले में आरक्षित वनों में कुल 4,601 अतिक्रमणकारियों ने 5,072.653 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया है और अब तक कुल अतिक्रमित वन भूमि का केवल 1.8 प्रतिशत ही पुनः प्राप्त किया जा सका है।
कोर्ट ने कहा, अतिक्रमणकारियों के रूप में सूचीबद्ध 118 व्यक्तियों की पहचान सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के रूप में की गई है, जिनमें सेना, पुलिस, सीआरपीएफ, वन विभाग, राजस्व विभाग, बिजली बोर्ड, आंगनवाड़ी, स्कूल शिक्षा, पंचायत, सर्वेक्षण विभाग और अन्य सेवाओं के कर्मी शामिल हैं। पीठ ने सीईसी को जमीनी सत्यापन करने और सभी निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित होने तक त्रैमासिक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सीईसी को 28 अगस्त तक सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया और मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।