सुप्रीम कोर्ट ने नोट दाखिल करने की इजाजत दी
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद केमामले के एक अन्य पक्षकार उमेश चंद्र पांडेय ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर नोट दाखिल किया है। उमेश चंद्र पांडेय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी शेखर ने गुरुवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से गुहार लगाई कि वह मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना नोट दाखिल करने की इजाजत मांगी। जिस पर चीफ जस्टिस ने हल्के अंदाज में कहा, क्या अयोध्या मामला अभी भी चल रहा है। हमें तो लगता है कि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है।’ हालांकि चीफ जस्टिस ने वी शेखर को नोट दाखिल करने की इजाजत दे दी।
पांडेय ने अपने नोट में कहा है कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड या रामलला विराजमान का विवादित जमीन पर मालिकाना हक का दावा साबित न हुआ तो विवादित जमीन सरकार को सौंप दी जाए। इसके बाद सरकार यह तय करे कि इस जमीन का क्या करना है। मालूम हो कि गत 16 अक्टूबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए पक्षकारों को तीन दिनों के भीतर मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर लिखित जवाब दाखिल करने केलिए कहा था। हालांकि तीन दिनों की समयसीमा खत्म होने केबाद भी पक्षकारों द्वारा नोट दाखिल करने का दौर जारी है।