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SIR: 60 लाख वोटों से मिली थी ममता बनर्जी को बढ़त, 58 लाख वोटर हुए डिलीट; एसआईआर ने कर दिया खेला

Fri, 12 Dec 2025 07:53 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को भाजपा से केवल 60 लाख वोट ज्यादा मिले थे। इस बार वोटर लिस्ट से 58 लाख नाम काट दिए गए  हैं। क्या इससे चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है? क्या यह ममता बनर्जी की हार का कारण बन सकता है?
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने अपने करीबी प्रतिद्वंदी भाजपा से लगभग 60 लाख वोटों की बढ़त बनाई थी। लेकिन इस बार हुए विशेष मतदाता पुनरीक्षण के बाद 58 लाख से ज्यादा मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा। क्या इससे ममता बनर्जी के समीकरण खराब हो सकते हैं? क्या एसआईआर पर ममता बनर्जी के गुस्से का असली कारण यही है?

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2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव लगभग आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील हो गए थे। कांग्रेस और वामदलों के हथियार डालने के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ही दो प्रमुख खिलाड़ी चुनाव मैदान में रह गए थे। इस चुनाव में विजयी हुई ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी को 2 करोड़ 89 लाख 68 हजार 281 लोकप्रिय वोट मिले थे। जबकि उसकी प्रतिद्वंदी भाजपा को 2 करोड़, 29 लाख 05 हजार 474 लोकप्रिय वोट मिले थे। दोनों दलों के लोकप्रिय मतों के बीच केवल 60 लाख 62 हजार 807 वोटों का ही अंतर था। 

गुरुवार को चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि एसआईआर के बाद इस बार प. बंगाल में 58 लाख 08 हजार 202 नाम काटे जा सकते हैं। ये मतदाता लोग या तो मृत हो गए हैं, या उन्होंने अपना आवास बदल लिया है, या उन्हें उनके पतों पर नहीं पाया गया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में शामिल  24,18,699 लोग अब मृत हो चुके हैं। 12 लाख से ज्यादा मतदाता 'गायब' हो गए हैं। अपना आवास बदलने या एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में करीब 20 लाख लोगों के नाम भी मतदाता सूची से काटे जाएंगे। 
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ये मतदाता किसके
आरोप लगते रहे हैं कि चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता फर्जी नामों से वोट डलवाते रहे हैं। मृत मतदाताओं के नाम से भी सत्तारूढ़ पार्टी को वोट डाले जाते रहे हैं। भाजपा का आरोप रहा है कि अवैध घुसपैठिये लाभ की लालच में तृणमूल कांग्रेस को वोट देते रहे हैं। इस बार मतदाता सूची से काटे गए नामों में 12 लाख के करीब ऐसे भी मतदाता शामिल हैं जो चुनाव आयोग के द्वारा 'गायब' बताए गए हैं। अनुमान है कि इन गायब मतदाताओं में एक बड़ी संख्या उन बांग्लादेशी वोटरों की हो सकती है जो एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बांग्लादेश की ओर भागते देखे गए थे। 

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क्या हारेंगी ममता बनर्जी? 
तो क्या इस बार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बड़ा नुकसान हो सकता है? क्या यह उनके चुनाव हारने का कारण बन सकता है? स्थानीय पत्रकार दीप्ति घोष अमर उजाला को बताती हैं कि एसआईआर के कारण टीएमसी के खेमे में एक डर तो देखा जा रहा है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि एसआईआर सीधे तौर पर ममता बनर्जी की हार का कारण बन सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई भी नेता मौजूद नहीं है। भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ती है, लेकिन वहां के लोग जानते हैं कि मोदी वहां मुख्यमंत्री बनने के लिए बंगाल नहीं आएंगे। जब उन्हें स्थानीय नेताओं में बेहतर चुनने की बात आती है तो उनके पास ममता बनर्जी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
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चुनाव सुधार नहीं रोक सकता विपक्ष- सत्यप्रकाश मिश्रा 
एनडीए के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता सत्यप्रकाश मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि ममता बनर्जी की बौखलाहट सामने आ रही है। वे जान रही हैं कि इस बार वे मरे हुए या फर्जी लोगों के नाम पर वोट नहीं डलवा पाएंगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले ईवीएम पर आरोप लगा रहा था, अब वे एसआईआर पर आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक चुनाव आयोग का विरोध कर रहा है, लेकिन केवल विपक्ष की नाराजगी देखते हुए चुनाव सुधार को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का समय खत्म हो गया है क्योंकि अब चुनाव में फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकेगा। 

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