फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रिक्स सम्मेलन: मोदी के मंच पर होंगे पुतिन व जिनपिंग, दिल्ली में दिखेगी नई विश्व व्यवस्था की तस्वीर?

सार

ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर रहेगी। भारत रूस और चीन के साथ रणनीतिक रिश्ते रखते हुए अमेरिका से भी संतुलन बनाए रख रहा है। क्या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने के मुद्दे पर ब्रिक्स आगे बढ़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट
Register For Event
विज्ञापन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी के भारत मंडपम में 12 व 13 सितंबर की सुनहरी धूप में दुनिया की निगाहें वैश्विक कूटनीति के एक अनूठे नजारे पर होंगी। प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग साथ खड़े दिखाई देंगे। यह नजारा उस बदलती वैश्विक व्यवस्था की तस्वीर पेश करेगा, जिसमें भारत, रूस और चीन के साथ अपने रणनीतिक हित साधते हुए अमेरिका के साथ रिश्तों का संतुलन भी कायम रख रहा है।
विज्ञापन


यह ब्रिक्स सम्मेलन इसलिए खास होगा क्योंकि दुनिया की नजर संगठन के एजेंडे के साथ ही इन तीनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर होगी। मंच पर इन तीनों नेताओं की मौजूदगी पश्चिम को यह संदेश देगी कि भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का पैरोकार है। रूस की ओर से पुतिन के आने की घोषणा हो चुकी है, जबकि जिनपिंग लगभग 400 लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि चीन की ओर से उनकी यात्रा पर आधिकारिक बयान जारी होना बाकी है।

कूटनीतिक यथार्थवाद
चीन के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में गतिरोध के बावजूद आर्थिक व बहुपक्षीय मंचों पर संवाद जारी रखना और अमेरिका के कड़े रुख के बावजूद रूस के साथ ऊर्जा संबंध बनाए रखना भारत का कूटनीतिक यथार्थवाद दर्शाता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: जनगणना: जवाब न देने पर भी दर्ज होगी जानकारी, धर्म परिवर्तन व अंतरजातीय विवाह की स्थिति का भी चलेगा पता चलेगा?

डी-डॉलराइजेशन की सुगबुगाहट
ब्रिक्स सम्मेलन का आर्थिक आयाम भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने यानी डी-डॉलराइजेशन के लिए ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की मांग इस बार और तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, भारत का रुख इसमें हमेशा संतुलित रहा है।

भविष्य का ब्लूप्रिंट
ब्रिक्स 2026 का महाकुंभ इस बात का प्रमाण होने जा रहा है कि 21वीं सदी की भू-राजनीति केवल श्वेत और श्याम/ ब्लैक एंड व्हाइट नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रे शेड्स की दुनिया है, जहां देश अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए एक साथ कई नावों में सवार हो सकते हैं। भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी कर यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय करने वाला प्रमुख ध्रुव बन गया है।
विज्ञापन


ब्रिक्स फैक्ट
  • वर्ष 2006 में स्थापना
  • पहला शिखर सम्मेलन 2009 में
  • वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका का प्रवेश
  • भारत की अध्यक्षता में 18वां शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को
  • मौजूदा सदस्य देश-- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया
  • वैश्विक हिस्सेदारी-- दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व
  • उद्देश्य-- पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले वित्तीय संस्थानों को संतुलित करना। वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा करना। बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था मजबूत करना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें