मुंबई की विशेष अदालत ने 27 वर्षीय पुरुष को लोकल ट्रेन में नाबालिग लड़की को बार-बार छूने के मामले में दोषी ठहराया। आरोपी को आईपीसी 354(D) और पॉक्सो अधिनियम के तहत तीन महीने की जेल हुई, जिसमें जांच के दौरान बिताई गई हिरासत की अवधि घटाई गई।
मुंबई की एक विशेष अदालत ने 27 साल के एक पुरुष को लोकल ट्रेन में नाबालिग लड़की को यौन उत्पीड़न करने के मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सामान्य डिब्बे में यात्रा करना किसी पुरुष को महिला यात्री को बार-बार छूने का अधिकार नहीं देता। विशेष न्यायाधीश नीता अणेकर ने 1 नवंबर को यह आदेश दिया।
पीड़िता ने बताया कि उसके कॉलेज के दोस्त अक्सर उसके साथ यात्रा करते हैं और वे सभी सेकंड क्लास में ही सफर करते हैं। अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह संभव है कि पीड़िता अपने दोस्तों के साथ यात्रा करने के लिए सेकंड क्लास का डिब्बा चुनती हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे डिब्बा महिला यात्री के लिए आरक्षित न हो, फिर भी किसी पुरुष का महिला यात्री को बार-बार छूना सही नहीं है।
एक साल से पीड़िता का पीछा कर रहा था आरोप
प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, 17 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि आरोपी पिछले एक साल से उसका पीछा कर रहा था। वह अक्सर उसी ट्रेन में आता और जिस डिब्बे में पीड़िता कॉलेज जाती थी, उसमें खड़ा रहता। चार जनवरी 2019 को हुई घटना में पीड़िता अपने बड़े भाई के साथ ट्रेन में यात्रा कर रही थी।