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Kerala: विधानसभा में तबादलों को लेकर हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; पूर्व CM विजयन ने लगाए सियासी हस्तक्षेप के आरोप

Wed, 03 Jun 2026 11:17 AM IST
रिया दुबे तिरुवनंतपुरम, आईएएनएस

सार

केरल विधानसभा में कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने राजनीतिक बदले की भावना से तबादले किए जाने और बिचौलियों के हस्तक्षेप का आरोप लगाया। 
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केरल विधानसभा - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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केरल विधानसभा में बुधवार को कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद राजनीतिक बदले की भावना से तबादले किए जा रहे हैं और पोस्टिंग प्रक्रिया पर बिचौलियों व सत्ता से जुड़े लोगों का प्रभाव है।

वी जॉय ने लगाए क्या आरोप?

सीपीआई(एम) विधायक वी जॉय ने सदन में कहा कि बिना तय मानकों का पालन किए तबादले किए जा रहे हैं और पसंदीदा लोगों को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि 33 विभागों में 207 तबादला आदेश जारी किए गए हैं, जिनसे 2,000 से अधिक कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

राज्य मंत्री ने आरोपों को किया खारिज

हालांकि, राज्य मंत्री सनी जोसेफ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी तबादले निर्धारित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मई में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से रिक्तियां पैदा होती हैं, जिसके कारण विभिन्न विभागों में तबादले स्वाभाविक रूप से होते हैं।

विजयन ने क्या दावा किया?

स्पीकर द्वारा इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव नामंजूर किए जाने के बाद विजयन ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ मोर्चे से जुड़े संगठन के पदाधिकारी तबादला प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों, महिलाओं, बीमार कर्मियों और कमजोर वर्गों के कर्मचारियों को दूरदराज के इलाकों में भेजा जा रहा है।
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विजयन ने यह भी दावा किया कि कई तबादलों पर केरल प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने रोक लगाई है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासनिक फैसलों में बिचौलियों की भूमिका भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को बढ़ावा दे सकती है।

विपक्ष ने नियमों को दरकिनार कर किए गए तबादलों को रद्द करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।
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