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कर्ज के जाल में कर्नाटक!: बोम्मई ने मांगा श्वेत पत्र, कहा-ठेकेदारों के 23,000 करोड़ अटके; किसान भी बेहाल

Sat, 06 Jun 2026 10:29 PM IST
राकेश कुमार आईएएनएस, हावेरी।

सार

पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में बताते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से श्वेत पत्र की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 4.5 लाख करोड़ के बजट का 90% हिस्सा अनिवार्य खर्चों में जा रहा है, जिससे विकास कार्य ठप हैं और किसान खाद-बीज की किल्लत से जूझ रहे हैं।
 
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बसवराज बोम्मई, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री - फोटो : ANI/Sansad TV
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विस्तार
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कर्नाटक की वित्तीय स्थिति इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने शनिवार को कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से राज्य की वास्तविक आर्थिक हालत पर तुरंत एक श्वेत पत्र जारी करने की पुरजोर मांग की है। बोम्मई ने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे पिछली सरकार से कैसी वित्तीय स्थिति विरासत में मिली थी।
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भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अकेले उत्तर कर्नाटक में ठेकेदारों के करीब 23,000 करोड़ रुपये के बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इन बिलों के भुगतान को लेकर अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों पर उत्पीड़न और खुलेआम भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लग रहे हैं।

बोम्मई ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उस बयान पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने अधिकारियों को सिस्टम को दरकिनार न करने की सलाह दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद किसी स्पष्ट नीति के बिना काम कर रही है, तो मुख्यमंत्री के इस सिस्टम का वास्तविक अर्थ आखिर क्या है।
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बजट का 90 फीसदी हिस्सा अनिवार्य खर्चों में
बसवराज बोम्मई ने दावा किया कि कर्नाटक के 4.5 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वेतन, पेंशन, ऋण भुगतान और गारंटी योजनाओं जैसे अनिवार्य खर्चों में ही खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में राज्य के विकास कार्यों के लिए बहुत ही कम राशि बचती है। उन्होंने पूछा कि इस वित्तीय कुप्रबंधन के बीच सरकार कर्नाटक के विकास का नेतृत्व कैसे कर पाएगी।

उन्होंने सरकार को श्वेत पत्र के जरिए यह बताने की चुनौती दी कि उधार लिए गए धन का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय में हो रहा है या सिर्फ रेवड़ियां बांटने में। बोम्मई ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के भीषण संकट के दौरान भी उनकी सरकार ने कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखा था, अनावश्यक खर्चों में कटौती की थी और राजस्व का रिसाव रोककर अर्थव्यवस्था को पूरी मजबूती से संभाला था।

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अन्नदाता संकट में, खाद-बीज की कालाबाजारी
कृषि क्षेत्र की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंतरिक राजनीतिक कलह और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण यह सरकार किसानों की समस्याओं को पूरी तरह भूल चुकी है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए बीज और उर्वरक की उपलब्धता जैसे सबसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता तक नहीं दी गई।
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राज्य के कई इलाकों से बीज और खाद की भारी किल्लत की शिकायतें आ रही हैं। व्यापारी इस संकट का फायदा उठाकर जमाखोरी कर रहे हैं और किसानों को ऊंचे दामों पर कृषि उत्पाद बेच रहे हैं। बोम्मई ने सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देकर उचित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की तमाम अटकलों को पूरी तरह निराधार और काल्पनिक बताया।




 
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