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एसआईआर: कर्नाटक में मिले 1.10 लाख फॉर्म-सात आवेदन, 93.47 प्रतिशत मामलों में सुनवाई पूरी; कब आएगी फाइनल लिस्ट?

Fri, 09 Oct 2026 02:59 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, बंगलूरू, कर्नाटक

सार

कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-सात आवेदन मिले हैं। सीईओ अंबुकुमार ने फर्जी आवेदनों पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और जांच के आदेश दिए हैं।
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कर्नाटक में एसआईआर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्तियां जताने के लिए कर्नाटक में 1,10,654 'फॉर्म-सात' आवेदन मिले हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के हवाले से जारी एक बयान में कहा गया है कि नौ अक्तूबर तक राज्य में कुल 4,51,61,393 मतदाता थे, जिनमें 2,24,03,422 पुरुष, 2,27,55,113 महिलाएं और 2,858 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कुल 43,82,315 नोटिस जारी किए गए, जिनमें से 43,73,745 लोगों तक पहुंचाए गए, यानी डिलीवरी रेट 99.80 प्रतिशत रहा। सीईओ ऑफिस के बयान के मुताबिक पहुंचाए गए नोटिसों में से 40,88,099 मामलों (यानी 93.47 प्रतिशत) में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 2,85,646 मामले अभी भी पेंडिंग हैं।
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बयान में कहा गया है कि दावों और आपत्तियों के निपटारे की आखिरी तारीख 22 अक्तूबर होगी और फाइनल वोटर लिस्ट 27 अक्तूबर को पब्लिश की जाएगी। आखिरी सुनवाई 12 अक्तूबर को होनी है, जबकि दावों और आपत्तियों के निपटारे और नोटिस वाले चरण को पूरा करने की डेडलाइन 22 अक्तूबर है। 16 जून से 8 अक्तूबर के बीच, राज्य को चार कैटेगरी में कुल 23,02,215 आवेदन मिले- 9,52,497 'फॉर्म-छह' आवेदन, 4,712 'फॉर्म-छह ए' आवेदन, 1,10,654 'फॉर्म-सात' आवेदन और 12,34,352 'फॉर्म-आठ' आवेदन।
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'फॉर्म-छह' का इस्तेमाल कहां होता है?
'फॉर्म-छह' का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है, जिसमें पहली बार वोट देने वाले योग्य लोग भी शामिल हैं। 'फॉर्म-छह ए' उन भारतीय नागरिकों के लिए है जो विदेश में रहते हैं और वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं। फॉर्म-सात का इस्तेमाल प्रस्तावित नाम जोड़ने पर आपत्ति जताने या मौजूदा वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के लिए किया जाता है। फॉर्म-आठ का इस्तेमाल वोटर लिस्ट की जानकारी में सुधार, पता बदलने और वोटर फोटो पहचान पत्र को बदलने जैसी मंजूर सेवाओं के लिए किया जाता है।

सीईओ ऑफिस ने बताया कि फॉर्म नौ, दस, 11, 11ए और 11बी के जरिए मिले दावों और आपत्तियों की निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से जानकारी आम लोगों की जानकारी के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पब्लिश कर दी गई है। इसमें यह भी कहा गया कि जिला चुनाव अधिकारियों, अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारियों और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को उन आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने फॉर्म छह, छह-ए, सात और आठ के जरिए गलत दावे और आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने क्या कहा?
प्रेस रिलीज में याद दिलाया गया कि एक अक्तूबर को जिला चुनाव अधिकारियों को फॉर्म-छह, फॉर्म-छह ए, फॉर्म-सात और फॉर्म-आठ के गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई शुरू करने के लिए एक पत्र भेजा गया था। चुनाव अधिकारियों को एक अक्तूबर को लिखे अपने पत्र में अंबुकुमार ने कहा, 'ऑफिस के ध्यान में आया है कि ईआरओ के पास फॉर्म-सात में बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए जा रहे हैं। यह भी आरोप है कि ऐसे फॉर्म असली नहीं हैं।' मीडिया के साथ शेयर किए गए पत्र में कहा गया कि इस संबंध में निर्देश दिया जाता है कि संबंधित ईआरओ उस आवेदक के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे जिसने आवेदन/फॉर्म (फॉर्म छह, छह-ए, सात और आठ) में जानबूझकर लिखित रूप में गलत बयान या घोषणा की है। जैसा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के प्रावधानों में बताया गया है। ऐसी कार्रवाई से पहले मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20 के तहत जांच की जाएगी।
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