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दिमागी बुखार के मामले छह साल में 62% घटे: फिर भी मौत का अनुपात बढ़ा; यूपी-बिहार में कैसे थमा इंसेफेलाइटिस?

सार

जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले घटने के बावजूद मौत का अनुपात ने चिंता बढ़ाई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश ने मरीजों और मौतों, दोनों को काफी हद तक रोकने में सफलता पाई है। अब केंद्र दूसरे राज्यों से भी यूपी के तरीके अपनाने को कह रहा है। आखिर यूपी ने ऐसा क्या किया? पढ़िए रिपोर्ट
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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देश में पिछले छह साल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) यानी दिमागी बुखार के मामलों में बहुत कमी आई है, लेकिन मौतों का अनुपात कुछ बढ़ा है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में देश में जेई के 2,545 मामले सामने आए थे, जिनमें 266 मरीजों की मौत हुई थी। वहीं, 2025 में मामले घटकर 975 रह गए, लेकिन मौतें 110 हुईं। इस तरह पिछले छह साल में मरीजों की संख्या करीब 62 फीसदी कम हुई, लेकिन मौतों में कमी करीब 59 फीसदी रही।
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आंकड़ों के मुताबिक, इन छह वर्षों में मामलों के मुकाबले मौतों का अनुपात थोड़ा बढ़ा है। सरल भाषा में कहें तो 2019 में दिमागी बुखार के हर 100 मरीजों में करीब 10 की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा करीब 11 मरीज प्रति 100 हो गया। जाहिर है बीमारी के मामले कम हुए हैं, लेकिन जो मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनमें मौत का खतरा अभी भी चिंता का कारण बना हुआ है।

देश में 2019 से 2025 तक इस तरह बदलती गई तस्वीर
साल मामले मौतें
2019 2,545 266
2020 729 82
2021 787 70
2022 1,109 130
2023 1,107 65
2024 1,472 105
2025 975 110
2026* 427 47
 
  • बिहार की तस्वीर यूपी से अलग है। यहां जेई के मामले कम हुए हैं, लेकिन मौत का अनुपात अभी भी ज्यादा है। 2019 में बिहार में 135 जेई मामले सामने आए थे और 27 मरीजों की मौत हुई थी। 2025 में मामले घटकर 28 और मौतें पांच रह गईं। यानी छह साल में मामलों में करीब 79% की कमी आई, जबकि मौतों में करीब 81% कमी हुई। 
  • 2026 में 31 जुलाई तक बिहार में 20 मामले और तीन मौतें दर्ज की गई हैं। इस साल अब तक राज्य में मौत का अनुपात करीब 15% बैठता है। बिहार में जेई के साथ एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का बोझ भी लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। खासकर मुजफ्फरपुर में एईएस के गंभीर प्रकोप सामने आते रहे हैं।
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2026 में अब तक 427 मामले, 47 मौतें
इस साल 31 जुलाई तक देश में जेई के 427 मामले और 47 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें असम सबसे आगे है, जहां 261 मामले और 36 मौतें हुई हैं। बिहार में 20 मामले और तीन मौतें, जबकि उत्तर प्रदेश में चार मामले सामने आए हैं और किसी मौत की सूचना नहीं है। केरल में आठ मामले और चार मौतें दर्ज हुई हैं। जेई के कम होते मामलों के बीच अब सरकार का पूरा फोकस मौतों को कम करने पर है।

2019 से 2025 के बीच जेई के मामले करीब 62% घटे, लेकिन मृत्यु अनुपात 10.45% से बढ़कर 11.28% हो गया। केंद्र सरकार ने अब जिन राज्यों में जेई के मामले बढ़ रहे हैं, उन्हें यूपी से सीख लेकर अपने यहां व्यवस्था में सुधार लाने को कहा है।

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यूपी में मामलों-मौतों में बड़ी कमी : कभी जेई से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे उत्तर प्रदेश ने इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जबरदस्त काम किया है, आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। 2019 में यूपी में 235 जेई मामले और 21 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में मामले घटकर 63 और मौतें दो रह गईं। छह साल में मामलों में करीब 73% और मौतों में करीब 90% की कमी आई। इससे भी ज्यादा बदलाव 2026 के शुरुआती सात महीनों में दिख रहा है, जहां जेई के सिर्फ चार मामले सामने आए और किसी मरीज की मौत नहीं हुई।
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