जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया हिंसा और कथित तोड़फोड़ की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर शुभ शंकर सरकार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि सरकार ने जांच को प्रभावी तरीके से संचालित करने में असमर्थता जताते हुए यह जिम्मेदारी छोड़ दी।
विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार सेलिम बॉक्स मंडल ने बताया कि शुभ शंकर सरकार ने समिति की अध्यक्षता करने में असमर्थता जताई है। अब विश्वविद्यालय जल्द ही समिति के लिए नए अध्यक्ष की नियुक्ति करेगा।
शुभ शंकर सरकार ने क्यों छोड़ी जिम्मेदारी?
शुभ शंकर सरकार ने शनिवार को जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य को ईमेल भेजकर बताया था कि वह जांच समिति की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल दिल्ली में हैं और इस जांच के लिए घटना के समय विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद लोगों के साथ नियमित बातचीत जरूरी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें ऑनलाइन माध्यम से जांच करने का विकल्प दिया था, लेकिन उनका मानना था कि केवल वर्चुअल बातचीत के जरिए जांच को प्रभावी ढंग से पूरा करना संभव नहीं होगा।
20 अगस्त को हुआ था ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों में टकराव
जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में 20 अगस्त की सुबह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी विचारधारा वाले छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प हुई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर परिसर में बाहरी लोगों को बुलाने का आरोप लगाया था। एबीवीपी का आरोप है कि एसएफआई और डीएसओ-डीएसएफ समेत वामपंथी छात्र संगठनों ने फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी स्टूडेंट्स यूनियन (FETSU) की बैठक की आड़ में टकराव शुरू किया। वहीं, वामपंथी छात्र संगठनों ने एबीवीपी पर बाहरी लोगों को विश्वविद्यालय परिसर में लाने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया।
21 अगस्त को गठित हुई थी जांच समिति
विश्वविद्यालय ने 21 अगस्त को छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों के प्रदर्शन के बाद पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में कथित तोड़फोड़ की घटना की जांच की मांग की थी। शुभ शंकर सरकार के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले आरएसएस से जुड़े शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने भी कुलपति को पत्र लिखकर उनके समिति अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध किया था।
शिक्षक संगठन ने उठाए नियुक्ति पर सवाल
संगठन ने शुभ शंकर सरकार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे जांच की विश्वसनीयता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हो सकता है। संगठन ने मांग की कि जांच समिति की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को दी जाए, ताकि जांच स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से हो सके। संगठन की जादवपुर विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष भास्कर सरदार ने सरकार के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने शुभ शंकर सरकार के पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन के अध्यक्ष पद से जुड़े पुराने विवादों का भी उल्लेख किया। वहीं, एबीवीपी के एक प्रवक्ता ने भी सरकार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय परिसर में हुए हमले की जांच समिति का नेतृत्व नहीं करना चाहिए।