पहले बैच में सभी हैं वायुसेना अधिकारी
पहले बैच में चुने गए चारों अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना से हैं और सभी टेस्ट पायलट रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- एयर कमोडोर प्रशांत बी नायर
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
इनका चयन इसलिए किया गया था क्योंकि शुरुआती मानव मिशनों में सुरक्षित उड़ान सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।
हेलिकॉप्टर पायलट भी हो सकते हैं शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे बैच में फाइटर पायलटों के अलावा भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलटों को भी मौका मिल सकता है।
नागरिक कब जाएंगे अंतरिक्ष?
हालांकि दूसरे बैच में नागरिकों का चयन होगा, लेकिन उन्हें चौथे गगनयान मिशन से अंतरिक्ष उड़ानों में शामिल किया जा सकता है। यानी शुरुआती मिशनों में अनुभवी सैन्य पायलटों को ही प्राथमिकता मिलेगी।
भारत के स्पेस स्टेशन की तैयारी
यह कदम केवल गगनयान तक सीमित नहीं है। इसरो भविष्य में नियमित मानव मिशन, अंतरिक्ष में वैज्ञानिक रिसर्च और भारत के प्रस्तावित स्पेस स्टेशन की तैयारी कर रहा है। इसी कारण लंबे समय के लिए स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की योजना बनाई जा रही है।
तीसरे बैच में और बढ़ेगी नागरिकों की संख्या
समिति के अनुमान के अनुसार:
- तीसरे बैच में 12 अंतरिक्ष यात्री होंगे।
- इनमें दो मिशन पायलट होंगे।
- 10 नागरिक विशेषज्ञ होंगे।
कुल मिलाकर भविष्य में 40 एस्ट्रोनॉट्स का कैडर बनाने की योजना है।
ट्रेनिंग में लगेंगे 4.5 साल
एक अंतरिक्ष यात्री के चयन, प्रशिक्षण और मिशन तैयारी की पूरी प्रक्रिया लगभग 4.5 साल की बताई गई है। फिलहाल इसरो के पास अस्थायी प्रशिक्षण केंद्र है और जल्द ही पूर्ण विकसित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जा सकता है।