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भारतीय सेना को मिला नागास्त्र-2: 50 किमी दूर से दुश्मन के टैंकों को बना सकता है निशाना; क्या हैं खूबियां?

Fri, 23 Oct 2026 10:52 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड भारतीय सेना को स्वदेशी नागास्त्र-2 एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम (आत्मघाती ड्रोन) दे रही है। यह 50 किलोमीटर तक की दूरी पर लक्ष्य को निशाना बना सकता है और इसकी उड़ान अवधि 60 मिनट तक है। इसमें दिन-रात निगरानी कैमरे, चार किलोग्राम का वारहेड और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से निपटने में मदद करने वाली ईसीसीएम क्षमता है। कंपनी के अनुसार, इसने अगस्त 2026 में तकनीकी परीक्षण पूरे किए हैं।
 
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नागास्त्र-2 की ताकत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक पर काम जारी है। इसी कड़ी में नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड भारतीय सेना को नागास्त्र-2 नाम का एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम दे रही है। यह ऐसा हथियार है, जो लक्ष्य वाले इलाके में निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर बख्तरबंद लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकता है। इसे खास तौर पर टैंकों जैसे मजबूत कवच वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है।
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कितनी दूर तक हमला कर सकता है नागास्त्र-2?
नागास्त्र-2 की मारक दूरी इस्तेमाल के तरीके के हिसाब से अलग-अलग है। कंपनी के मुताबिक, इसे वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल करने वाले मोड में इसकी परिचालन सीमा 25 किलोमीटर है। वहीं, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में यह 50 किलोमीटर तक जा सकता है। इसकी उड़ान अवधि 60 मिनट तक है। इससे सेना को लक्ष्य के मुताबिक हथियार इस्तेमाल करने में लचीलापन मिलता है।

टैंकों के मजबूत कवच को भेदने में कितना सक्षम?
नागास्त्र-2 में चार किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड लगा है। इसे ऐसे लक्ष्यों पर हमला करने के लिए बनाया गया है, जिन पर 650 मिलीमीटर तक मोटा रोल्ड होमोजीनियस आर्मर यानी आरएचए कवच लगा हो। आसान भाषा में कहें तो यह मजबूत बख्तरबंद सुरक्षा वाले लक्ष्यों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। इसमें दिन और रात, दोनों समय निगरानी करने वाले कैमरे भी लगे हैं।
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इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच कैसे काम करेगा नागास्त्र-2?
युद्ध के मैदान में दुश्मन संचार व्यवस्था बाधित करने, जीपीएस सिग्नल जाम करने या गलत लोकेशन सिग्नल भेजने की कोशिश कर सकता है। नागास्त्र-2 में इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स यानी ईसीसीएम क्षमता दी गई है। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान ऐसी बाधाओं के बीच सिस्टम की काम करने की क्षमता को मजबूत करना है। कंपनी के मुताबिक, यह सुविधा दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संबंधी चुनौतियों के बीच काम करने में मदद कर सकती है।

नागास्त्र-2 का परीक्षण कब और कहां हुआ?
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के मुताबिक, नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। कंपनी ने बताया कि परीक्षण के दौरान सेना के प्रतिनिधियों ने इसके संचालन और ईसीसीएम से जुड़े सभी मानकों के पालन को देखा। कंपनी के बयान में इसे स्वदेशी रक्षा निर्माण और आधुनिक हथियार प्रणालियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

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नागास्त्र-1आर से नागास्त्र-2 कितना अलग?
कंपनी के मुताबिक, भारतीय सेना ने वर्ष 2025 में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड को लगभग 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग म्यूनिशन खरीदने का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1आर में दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लॉन्चर सिस्टम की सुविधा है। इसमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा लगा है और रात में अभियान के लिए थर्मल कैमरा लगाने का विकल्प भी दिया गया है।
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कंपनी के बयान के अनुसार, नागास्त्र-1आर में वीडियो और टेलीमेट्री संचार के लिए खास एन्क्रिप्शन व्यवस्था है। इसमें दो मीटर सीईपी यानी सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी वाला सटीक निशाना लगाने का सिस्टम है और इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने बताया कि इस सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश में झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
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