भारत ने विभिन्न जातीय और धार्मिक समूहों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों वाली संयुक्त राष्ट्र की एक समिति की रिपोर्ट को बुधवार को खारिज कर दिया। समिति ने अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और रोहिंग्या शरणार्थियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई थी। उसने भारत में घृणा से जुड़े अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रिपोर्ट पर पूछे गए सवाल के जवाब में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत इस रिपोर्ट में की गई किसी भी राजनीतिक रूप से प्रेरित और अत्यधिक दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने कहा कि नस्लीय भेदभाव से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता अटल है।
भारत ने गिनाए संवैधानिक और कानूनी प्रावधान
जायसवाल ने कहा कि समीक्षा के दौरान भारत ने अपने संवैधानिक सुरक्षा उपायों, मजबूत कानूनी ढांचे, बहुलतावाद और वंचित समुदायों की सुरक्षा के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि समिति की टिप्पणियों का जवाब तय प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा।
मामले से जुड़ी खास जानकारी
- संयुक्त राष्ट्र समिति ने अनुसूचित जनजातियों के मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताई।
- रिपोर्ट में अनुसूचित जातियों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए।
- रोहिंग्या शरणार्थियों के मानवाधिकारों का मुद्दा भी समिति ने उठाया।
- समिति ने घृणा से जुड़े अपराधों में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
- भारत के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया था।
समीक्षा बैठक में भी भारत ने ठुकराए थे आरोप
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि समीक्षा बैठक के दौरान ही भारत के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल ने व्यापक सामान्यीकरण और बिना प्रमाण वाले आरोपों को खारिज कर दिया था। प्रतिनिधिमंडल ने समिति की उस प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें वह नस्लीय भेदभाव समाप्त करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के दायरे से आगे बढ़ती दिखी।
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