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Investment: भारत बना निवेश का पसंदीदा ठिकाना, एशिया-प्रशांत में शीर्ष स्थान; हिस्सेदारी 21% तक बढ़ी

Wed, 08 Apr 2026 06:59 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला ब्यूरो

सार

मैकिन्से सर्वे के मुताबिक एशिया-प्रशांत के 50 से अधिक निवेशकों में 31% ने भारत को शीर्ष निवेश विकल्प चुना। 76% ने इसे अपने शीर्ष तीन में रखा। भू-राजनीतिक और आर्थिक दबावों के बावजूद भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया, निजी इक्विटी व उद्यम पूंजी निवेश 2016-20 से 2021-25 के बीच 1.6 गुना बढ़कर 207 अरब डॉलर पहुंचा।

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निवेश - फोटो : Istock
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विस्तार
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वैश्विक निवेशकों की नजर में भारत सबसे आकर्षक बाजार के रूप में उभर रहा है। मैकिन्से के एक सर्वे के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सीमित साझेदारों (लिमिटेड पार्टनर्स) ने भारत को निवेश के लिए शीर्ष स्थान दिया है। 50 से अधिक संस्थाओं पर किए गए सर्वे में 31 फीसदी निवेशकों ने भारत को पहला स्थान दिया, जबकि 76 फीसदी ने इसे अपने शीर्ष तीन निवेश विकल्पों में शामिल किया। एशिया-प्रशांत के कुल निवेश में भारत की हिस्सेदारी भी 12 फीसदी से बढ़कर करीब 21 फीसदी हो गई है।

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यह रुझान ऐसे समय में दिखा, जब भू-राजनीतिक और आर्थिक दबावों के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य बाजारों में निवेश गतिविधियां धीमी पड़ी हैं। भारत ने इस सुस्ती के बीच बेहतर प्रदर्शन किया है। देश में निजी इक्विटी व उद्यम पूंजी निवेश 2016-20 से 2021-25 के बीच 1.6 गुना बढ़कर 207 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। 

इन क्षेत्रों में सर्वाधिक निवेश
2021-25 के दौरान तीन-चौथाई निवेश प्रमुख सेक्टरों में हुआ। 

  • टेक्नोलॉजी       29 फीसदी
  • वित्तीय सेवाएं    15 फीसदी
  • आईटी सेवाएं    13 फीसदी

भारत पर बढ़ता भरोसा 

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सर्वे के अनुसार, भारत अब एशिया-प्रशांत में कुल निवेश का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा आकर्षित कर रहा है। यूरोपीय निवेशकों की हिस्सेदारी 60 फीसदी तक पहुंच गई है। भारत में होने वाले कुल निवेश का करीब 64 फीसदी निजी बाजारों में लगाया जा रहा है। 50 फीसदी से अधिक निवेशक भारत में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, सिर्फ 5 फीसदी ही निवेश घटाने के पक्ष में हैं। 

चुनौतियां भी कम नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं, जैसे-मुद्रा जोखिम, जटिल कर प्रणाली, व्यापार करने में कठिनाइयां, अनुबंध लागू करने की समस्या और सीमित क्षेत्रों में निवेश का अधिक केंद्रित होना। विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजी बाजार में सुधार और नियामकीय बाधाओं में कमी लाने के बाद निवेश और बढ़ सकता है।
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