गृह मंत्रालय ने एसएसबी सहित अन्य सीएपीएफ बलों में ग्रुप ए, बी और सी स्तर के मंत्रालयिक कैडर की समीक्षा के लिए ई-फाइल के जरिये व्यय विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इसमें पदों की बढ़ोतरी या संरचना में बदलाव की मांग की गई थी। लेकिन व्यय विभाग ने इसे मंजूरी देने से इनकार कर दिया और फाइल वापस लौटा दी।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में मंत्रालयिक स्टाफ यानी बाबुओं की संख्या में अब कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के मंत्रालयिक कैडर रिव्यू की फाइल नामंजूर कर वापस लौटा दी है। विभाग ने साफ कहा, प्रस्ताव ठोस आधार पर नहीं है और सभी सीएपीएफ बलों को मंत्रालयिक पद बढ़ाने से बचना चाहिए।
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व्यय विभाग ने लिखा है कि एसएसबी का मंत्रालयिक कैडर रिव्यू प्रस्ताव आश्वस्त करने वाला नहीं है। विभाग ने गृह मंत्रालय को सलाह दी है कि कार्यालयी नियमों और प्रक्रियाओं को सरल एवं कारगर बनाया जाए, पेपर वर्क को काफी हद तक कम किया जाए और आईटी टूल्स के इस्तेमाल से मंत्रालयिक स्टाफ की संख्या को सीमित रखा जाए। यह सलाह सिर्फ एसएसबी तक नहीं, बल्कि सभी केंद्रीय सशस्त्र बलों पर लागू होगी।
ई-फाइल के जरिये व्यय विभाग को भेजा प्रस्ताव
गृह मंत्रालय ने एसएसबी सहित अन्य सीएपीएफ बलों में ग्रुप ए, बी और सी स्तर के मंत्रालयिक कैडर की समीक्षा के लिए ई-फाइल के जरिये व्यय विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इसमें पदों की बढ़ोतरी या संरचना में बदलाव की मांग की गई थी। लेकिन व्यय विभाग ने इसे मंजूरी देने से इनकार कर दिया और फाइल वापस लौटा दी। विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे प्रस्तावों पर भी सख्ती बरती जाएगी।
बीएसएफ केस में मिली आंशिक मंजूरी
हाल ही में बीएसएफ के मिनिस्ट्रियल कैडर रिव्यू को व्यय विभाग ने मंजूरी दी थी। इसमें पहली बार डिप्टी कमांडेंट स्तर पर 21 नए पद स्वीकृत हुए, लेकिन हवलदार (मिनिस्ट्रियल) के 143 पदों में कटौती कर दी गई। गृह मंत्रालय ने कुल 4640 पदों की सिफारिश की थी, जिसमें से 4497 पदों को मंजूरी मिली। एसएसबी के मामले में ऐसा कोई रियायत नहीं मिली।