300 साल से ज्यादा समय पहले विलुप्त हो चुका डोडो पक्षी फिर से धरती पर लौट सकता है। अमेरिकी बायोटेक कंपनी इसके सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार निकोबार कबूतर और जेनेटिक रिसर्च की मदद से इसे वापस लाने की कोशिश कर रही है। वैज्ञानिकों ने डोडो के जेनेटिक ब्लूप्रिंट का करीब 95% हिस्सा डिकोड कर लिया है। क्या इस शोध से विलुप्त डोडो को फिर से जीवित करना संभव हो सकेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
एजेंसी, श्री विजयपुरम। डोडो पक्षी को विलुप्त हुए 300 साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाया जाने वाला निकोबार कबूतर उसे वापस धरती पर लाने की उम्मीद जगा रहा है। अमेरिकी बायोटेक कंपनी डोडो को फिर से प्राप्त करने में लगी हुई है।
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डोडो उड़ नहीं सकता था और इंसानों द्वारा किए गए शिकार व बाहरी जानवरों के कारण 17वीं शताब्दी में मॉरीशस से पूरी तरह विलुप्त हो गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत के निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला निकोबार कबूतर डोडो का सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार है।
वैज्ञानिकों ने डोडो के डीएनए का लगभग 95% जेनेटिक ब्लूप्रिंट डिकोड कर लिया है। डोडो के विपरीत, निकोबार कबूतर उड़ सकता है और इसके पंख बेहद खूबसूरत, चमकदार हरे और तांबे जैसे रंग के होते हैं।
70 से अधिक जीवित पक्षियों का अध्ययन डोडो के बहुत सारे जेनेटिक सैंपल उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कंपनी ने एआई से 70 से ज्यादा जीवित पक्षियों की प्रजातियों के विकास का अध्ययन करके लगभग 2,300 ऐसे जेनेटिक टारगेट की पहचान की है।