विश्व आर्थिक मंच की 2026 की रिपोर्ट में ऐसी 10 उभरती तकनीकों की पहचान की गई है, जिनका आने वाले वर्षों में ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बड़ा असर पड़ सकता है। इनमें कुछ तकनीकें अभी विकास के दौर में हैं, जबकि कुछ प्रयोगशाला से बाहर निकलकर वास्तविक इस्तेमाल की तरफ बढ़ रही हैं। इनका मकसद ऊर्जा बचाने से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने तक है।
क्या बिना बिजली के ठंडक और साफ पर्यावरण संभव होगा?
एक उभरती तकनीक सतह की गर्मी को विकिरण के जरिये अंतरिक्ष की ओर भेजकर बिना बिजली या ईंधन के ठंडक पैदा करने की कोशिश करती है। इसका इस्तेमाल भवनों और औद्योगिक इकाइयों में बढ़ सकता है। पर्यावरण के लिए पीएफएएस जैसे लंबे समय तक बने रहने वाले रसायनों को कम हानिकारक बनाने की तकनीक पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा सूक्ष्मजीवों को छोटे कारखानों की तरह इस्तेमाल कर दूध और अंडे के प्रोटीन, औषधीय पदार्थ, कोलेजन और मकड़ी के रेशम जैसी सामग्री बनाने की कोशिश हो रही है।
क्या अगली पीढ़ी का एआई दुनिया को समझकर अनुमान लगा सकेगा?
रिपोर्ट में जिस नई पीढ़ी के एआई का जिक्र है, वह केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा। यह आसपास की दुनिया का एक आंतरिक मॉडल बनाकर घटनाओं के संभावित परिणामों का अनुमान लगाने की क्षमता विकसित कर सकता है। यानी एआई सिर्फ जानकारी देने के बजाय परिस्थितियों को समझकर आगे क्या हो सकता है, इसका अनुमान लगाने की दिशा में बढ़ रहा है। इन 10 तकनीकों की खासियत यही है कि इनका असर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और डिजिटल दुनिया में एक साथ बदलाव ला सकता है।