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आसमान से दुश्मन पर नजर रखेगी ये तीसरी आंख: डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण, 21 किमी की ऊंचाई पर पहुंचा एयरशिप

Tue, 06 Oct 2026 05:11 PM IST
देवेश त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने स्वदेशी उच्च ऊंचाई प्लेटफॉर्म प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान प्लेटफॉर्म 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर आधे घंटे से अधिक समय तक रहा। मिशन के बाद प्रणाली को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
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दुश्मन की हर चाल पर होगी भारत की तीसरी आंख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मंगलवार को स्वदेशी रूप से विकसित उच्च ऊंचाई प्लेटफॉर्म प्रणाली (हाई एल्टीट्यूड एयरशिप) का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस परीक्षण के दौरान प्रणाली ने 21 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और समताप मंडल में लंबे समय तक उड़ान भरने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
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इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत की निगरानी और एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समुद्र तल से 21 किमी की ऊंचाई पर भरी उड़ान
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान प्रायोगिक उड़ान समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंची। इसके बाद यह करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक रही। इसके बाद प्रणाली को वापस नीचे आने का निर्देश दिया गया।

उड़ान के बाद प्लेटफॉर्म को सुरक्षित तरीके से बरामद कर लिया गया। मिशन के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण कर इसके प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस परीक्षण ने प्लेटफॉर्म की समताप मंडल में काम करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। यह लंबे समय तक निगरानी, संचार और विभिन्न निगरानी अभियानों के लिए उपयोगी माना जाता है।
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जमीन पर हुई हर हलचल पर रहेगी नजर
उड़ान के दौरान हवा में मौजूद प्लेटफॉर्म से जमीन पर स्थित नियंत्रण केंद्र तक वास्तविक समय का वीडियो और वाहन के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े लगातार भेजे गए। अधिकारियों के अनुसार, प्रणाली में कई तरह के उपकरण और नियंत्रण प्रणालियां लगाई गई थीं। इनमें जड़त्वीय मापन इकाई, वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली का रिसीवर, कैमरे और ऊंचाई नियंत्रित करने वाली प्रणालियां शामिल थीं।

इसके अलावा कई अन्य उप प्रणालियां भी लगाई गई थीं। परीक्षण के दौरान इन सभी प्रणालियों ने अपेक्षित तरीके से काम किया। यह उड़ान परीक्षण कई एजेंसियों के समन्वय से किया गया। इनमें भारतीय वायुसेना, सैन्य विमान उड़ान योग्यता एवं प्रमाणन केंद्र, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य नागरिक प्राधिकरण शामिल रहे।

क्या है एसएपीएस की खसियत
  • महीनों तक लगातार उड़ान : यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलने वाला मानवरहित विमान है। दिन में सूरज की रोशनी से चार्ज होने वाली लीथियम-सल्फर बैटरियों के दम पर यह बिना नीचे उतरे लगातार 3 से 4 महीने तक हवा में रह सकता है।
  • पारंपरिक सैटेलाइट से बेहतर कवरेज : उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए किसी एक जगह से आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन एचएपीएस किसी एक रणनीतिक सीमा के ठीक ऊपर हफ्तों तक स्थिर रहकर 24x7 रियल-टाइम लाइव फीड प्रदान कर सकता है।
  • कम लागत व आसान रखरखाव : उपग्रहों को लॉन्च करने में सैकड़ों करोड़ का खर्च आता है, जबकि एचएपीएश को लॉन्च करना और रखरखाव बेहद सस्ता है। तकनीक बदलने पर इसे आसानी से नीचे उतारकर सेंसर अपग्रेड किए जा सकते हैं।

देश के लिए क्यों है गेम-चेंजर?
  • 21 किमी की सुरक्षित ऊंचाई : यह वाणिज्यिक उड़ानों (10-12 किमी) से बहुत ऊपर उड़ता है, जहां मौसम हमेशा साफ रहता है और हवा का दबाव बहुत कम होता है।
  • 16 हजार फीट की ऊंचाई पर पैराशूट का पहला परीक्षण
  • डीआरडीओ ने लद्दाख के नायोमा (मुध डी-जेड) में समुद्र तल से करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर उन्नत हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट का पहला लाइव जंप सफलतापूर्वक किया। यह पैराशूट सैनिकों को बड़ी संख्या में उतारने के लिए बनाया गया है। परीक्षण ने बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में एएचएपी की क्षमता और सैन्य उपयोगिता साबित की।

आगरा स्थित डीआरडीओ में बनाया गया हाई एल्टीट्यूड एयरशिप
उच्च ऊंचाई वाले इस प्लेटफॉर्म का डिजाइन और विकास आगरा स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा किया जा रहा है। यह हल्के से हवा में रहने वाली प्रणाली है। इसे लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम हवाई प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो समताप मंडल में लंबे समय तक काम कर सकेगा। इसका इस्तेमाल लंबे समय तक निगरानी और निगरानी से जुड़े विभिन्न अभियानों में किया जा सकता है। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग जगत से जुड़े साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को उन्नत एयरोस्पेस तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने लंबे समय तक समताप मंडल में उड़ान भरने में सक्षम वायुयान के विकास को भी अहम उपलब्धि बताया।
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