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Congress: 'किस बात के लिए आरएसएस की तारीफ कर रहे पीएम..', मोदी के भाषण पर कांग्रेस ने दी तीखी प्रतिक्रिया

Thu, 02 Oct 2025 10:04 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Congress: कांग्रेस ने आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संगठन की तारीफ पर सवाल उठाया और कहा कि यह वही संगठन है, जिसे गांधीजी की हत्या से जोड़ते हुए सरदार पटेल ने कभी प्रतिबंधित किया था। पार्टी ने गांधीजी के सहयोगी प्यारे लाल की किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि गांधी ने आरएसएस को 'तानाशाही सोच वाला सांप्रदायिक संगठन' बताया था।  
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सुप्रिया श्रीनेत - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री आरएसएस की तारीफ आखिर किस बात के लिए कर रहे हैं? केवल एक सिक्का जारी करके आप आरएसएस की तारीफ नहीं कर सकते। आरएसएस ऐसा संगठन है, जिसके हाथ महात्मा गांधी के खून से रंगे हैं और जिसे देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल ने प्रतिबंधित किया था। 
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आरएसएस  के 100 साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस ने गुएक पुरानी किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि महात्मा गांधी ने आरएसएस को 'तानाशाही सोच के साथ एक सांप्रदायिक संगठन' कहा था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह बात प्यारे लाल द्वारा लिखित गांधीजी की जीवनी में दर्ज है। प्यारे लाल गांधीजी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे और 1942 में महादेव देसाई की मृत्यु के बाद उनके सचिव बने थे।

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रमेश ने बताया कि 1956 में प्यारे लाल ने अपनी पुस्तक टमहात्मा गांधी: द लास्ट फेज' का पहला खंड नवजीवन प्रकाशन, अहमदाबाद से प्रकाशित किया था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की भूमिका और उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अनुशंसा भी शामिल थी। दूसरा खंड 1958 में प्रकाशित हुआ।

उन्होंने दावा किया कि दूसरे खंड के पेज नंबर 440 पर प्यारे लाल ने गांधीजी की एक बातचीत का जिक्र किया है, जो 12 सितंबर 1947 को हुई थी। उस बातचीत में गांधीजी ने आरएसएस को एक  'सांप्रदायिक संगठन जिसकी सोच तानाशाही है' बताया था। जयराम रमेश ने बताया कि इस बातचीत के करीब पांच महीने बाद तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही रमेश ने उस किताब का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें यह बात दर्ज है।

बुधवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ने आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा कि संगठन ने हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत पर काम किया, तो इसके जवाब में कांग्रेस ने उन्हें महात्मा गांधी की हत्या और उस समय के हालात की याद दिलाई। रमेश ने बुधवार को एक और पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री जी ने आज सुबह आरएसएस पर काफी कुछ कहा। क्या उन्हें पता है कि 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को क्या लिखा था? 

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इसके साथ उन्होंने उस चिट्ठी का एक हिस्सा भी साझा किया, जिसमें पटेल ने आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों को गांधीजी की हत्या के लिए जिम्मेदार माहौल बनाने वाला बताया था। उन्होंने लिखा, आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों ने ऐसा माहौल बनाया, जिसमें गांधीजी की हत्या जैसी भयानक त्रासदी संभव हो सकी। आरएसएस की गतिविधियां सरकार और राष्ट्र के अस्तित्व के लिए खतरा थीं। प्रतिबंध के बावजूद उनकी गतिविधियां बंद नहीं हुईं। रमेश ने यह भी कहा कि सरदार पटेल ने 19 दिसंबर 1948 को जयपुर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए भी आरएसएस पर तीखी टिप्पणी की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को आरएसएस के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेते हुए कहा था कि संघ पर हमले जरूर हुए, लेकिन उसने कभी कड़वाहट नहीं दिखाई और हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से काम करता रहा।

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