अंतरिक्ष का कचरा आसमान तक कैसे पहुंचता है?
धरती के चारों ओर पुराने सैटेलाइट और रॉकेटों के हजारों टुकड़े घूम रहे हैं। जब इनमें से कुछ धरती की ओर लौटते हैं, तो वायुमंडल में दाखिल होते समय हवा से टकराने के कारण बहुत गर्म हो जाते हैं। इस दौरान इनके कुछ हिस्से टूट जाते हैं और बेहद छोटे कण बन जाते हैं। इन कणों में एल्यूमिनियम और टाइटेनियम के ऑक्साइड जैसे पदार्थ होते हैं। ये धातु और ऑक्सीजन से बने पदार्थ हैं। इतने छोटे कणों को सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकता। वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि जब ये कण धरती से करीब 70 से 120 किलोमीटर ऊपर मौजूद बर्फ के कणों के संपर्क में आते हैं, तो क्या होता है?
बर्फ के कणों से जुड़ने पर क्या बदल सकता है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बर्फ के बेहद छोटे कणों को ऐसे समझ सकते हैं जैसे हवा में तैरते बर्फ के बारीक टुकड़े। जब अंतरिक्ष के कचरे से बने कण इनसे टकराते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में वे आपस में जुड़कर एक समूह बना सकते हैं। इससे बर्फ के कणों का आकार, उनकी बनावट और उनके आपस में जुड़ने का तरीका प्रभावित हो सकता है। ऊपरी आसमान में बर्फ के कणों से खास तरह के बादल भी बनते हैं। इसलिए अब वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि अंतरिक्ष से आने वाले कण इन बादलों के बनने और बदलने की प्रक्रिया को कितना प्रभावित कर सकते हैं।
बारिश और गर्मी पर असर पड़ेगा
ऊपरी आसमान में बर्फ के कणों और बादलों में बदलाव होने से सूर्य की रोशनी और गर्मी के व्यवहार पर भी असर पड़ने की संभावना है। वैज्ञानिक अब इस बात का भी पता लगाने में जुटे हैं कि क्या अंतरिक्ष के कचरे के कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है? बारिश का तरीका बदल रहा है या मौसम में कोई खास बदलाव आ रहा है?