पश्चिम एशिया संकट के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र सरकार को मौजूदा संकट से बचने के लिए LPG आपूर्ति और तेल का भंडारण सुनिश्चित करना चाहिए था।
पश्चिम एशिया पिछले दो हफ्ते से जंग की चपेट में है, अमेरिका-इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमले के कारण तेल और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत में ईरान की सीमा से लगे होर्मुज जलडमरूमध्य से 60 फीसदी पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति होती है। वहीं जंग की स्थिति के कारण यह आपूर्ति बाधित हो गई है। जिसके बाद से देश में भी कई जगहों पर एलपीजी और पेट्रोलियम पदार्थों की कमी की खबरें सामने आ रही है। अब इसे लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
'बिना सही योजना के प्रतिबंध लगाने से जनता होगी परेशानी'
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश में रसोई गैस की कमी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण जब ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, तब केंद्र सरकार को पहले से ही एलपीजी, तेल और गैस का पर्याप्त भंडार तैयार रखना चाहिए था। उनके अनुसार बिना सही योजना बनाए प्रतिबंध लगाने से लोगों को परेशानी हो रही है।
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'समस्या हल करने के बजाय राजनीति में जुटी है केंद्र सरकार'
एक बंगाली न्यूज चैनल से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्याप्त गैस और तेल का भंडार सुनिश्चित किए बिना ही फैसले ले लिए, जिससे हालात संभालना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार समस्याओं को हल करने के बजाय राजनीति में ज्यादा ध्यान दे रही है।
'केंद्र की नीति से कालाबाजारी करने वालों को मिल रहा बढ़ावा'
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे काम तो कर रही है, लेकिन देश में गैस और तेल के भंडार को ठीक से संभाल नहीं पा रही। उन्होंने दावा किया कि इस संकट से निपटने के लिए स्पष्ट नीति न होने की वजह से कालाबाजारी करने वालों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
अमेरिका-इस्राइल का ईरान पर हमला
दरअसल, पश्चिम एशिया में यह बड़ा युद्ध 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत सत्ता के कई अहम नेताओं की मौत हो गई थी। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है और हाल के दिनों में तेल डिपो तथा पानी के प्लांट जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी हमले की खबरें सामने आई हैं।