पालघर में 11 वर्षीय मयंक पर तेंदुए ने हमला किया, लेकिन बच्चे ने अपने स्कूल बैग को ढाल बनाकर और दोस्त के साथ पत्थर फेंककर खुद को बचा लिया। तेज आवाज और लोगों की मौजूदगी से तेंदुआ भाग गया। मयंक के हाथ में चोट आई है और उसका इलाज जारी है।
पालघर जिले में एक 11 वर्षीय छात्र ने जिस साहस का परिचय दिया, उसने पूरे क्षेत्र को चौंका दिया है। स्कूल से लौटते वक्त तेंदुए के हमले के बीच इस मासूम ने न केवल हिम्मत दिखाई बल्कि अपने दोस्त के साथ मिलकर आवाज लगाई और पत्थर फेंककर बड़े खतरे को टाल दिया। मौके की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि बच्चा अपनी पीठ पर टंगे स्कूल बैग की वजह से बड़ी चोट से बच गया।
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पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घटना शुक्रवार शाम माला पाडवपाड़ा इलाके के पास हुई, जब मयंक कुवारा स्कूल से घर लौट रहा था। तभी अचानक झाड़ियों से तेंदुआ निकला और उन पर झपट पड़ा। मयंक ने तुरंत बैग आगे कर लिया जिससे तेंदुए का वार उसी पर पड़ा। दूसरे बच्चे ने भी सूझबूझ दिखाते हुए पत्थर उठाकर तेंदुए पर फेंके।
दोस्त की हिम्मत से बची जान
दोनों बच्चों की जोरदार चीखों और पत्थरबाजी ने तेंदुए को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। आसपास के ग्रामीण आवाज सुनकर दौड़े तो तेंदुआ तुरंत जंगल की ओर भाग गया। अधिकारियों ने कहा कि तेज प्रतिक्रिया और बच्चों की सूझबूझ ने बड़ी दुर्घटना को टाल दिया।
इलाज जारी, हाथ पर आई चोट
हमले में मयंक कुवारा के हाथ पर पंजे से चोट आई है। उसे तुरंत विक्रमगढ़ ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। मेडिकल अधिकारियों ने बताया कि बच्चे के हाथ में टांके लगाए गए हैं और उसकी स्थिति स्थिर है।
वन विभाग ने बढ़ाई सतर्कता
कंचद के रेजिडेंट फॉरेस्ट ऑफिसर स्वप्निल मोहिते ने बताया कि घटना के बाद वनकर्मियों ने मौके का निरीक्षण किया और अस्पताल में बच्चे से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विभाग इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रहा है और कई एहतियाती कदम लागू कर रहा है।
स्कूलों के समय में बदलाव और निगरानी बढ़ी
वन विभाग ने तेंदुआ प्रभावित इलाकों के स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे शाम 4 बजे तक बंद कर दें। इसके अलावा तेंदुए की गतिविधि पर नजर रखने के लिए एआई आधारित कैमरा लगाया जा रहा है। गांवों में दवंडी यानी पारंपरिक सार्वजनिक घोषणा के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है।