पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कंपनी कमांडरों के लिए जारी हालिया आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, सीआरपीएफ के पश्चिम बंगाल सेक्टर के आईजी/स्टेट फोर्स कोऑर्डिनेटर ने चुनावी ड्यूटी पर तैनात कंपनी कमांडरों को तत्काल प्रभाव से होटल छोड़ने का आदेश दिया है। आदेश के तहत उन्हें उसी स्थान पर रात गुजारनी होगी, जहां कंपनी में शामिल जवानों को ठहराया गया है। एसएसबी की तरफ से भी गत सप्ताह ऐसा ही एक आदेश जारी किया गया है।
आईजी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा, चुनाव में तैनात जवानों की बॉडी लैंग्वेज संतोषजनक नहीं है। वह सकारात्मक और मजबूत होनी चाहिए। कंपनी कमांडरों से कहा गया है कि वे किसी भी घटना की सूचना तत्काल प्रभाव से अपने मुख्यालय को दें। सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कंपनी कमांडरों ने उक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वॉकआउट किया है। कंपनियों के साथ रहने के मुद्दे पर, कंपनी कमांडरों ने सवाल किया कि चुनावी ड्यूटी के लिए आने वाले पर्यवेक्षक भी होटलों में ठहर रहे हैं। चुनाव आयोग को इससे कोई आपत्ति नहीं है, तो फिर कंपनी कमांडरों को होटलों से बाहर जाने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
मोबाइल चार्जर, पीने का स्वच्छ पानी तक नहीं
जवानों के लिए रहने का स्थान तय मापदंडों से परे है। किचन, मोबाइल चार्जर, पीने का स्वच्छ पानी, ड्रेनेज सिस्टम और डाइनिंग स्पेस, ये सुविधाएं भी नहीं हैं। कैंप में पर्याप्त लाइट तक नहीं है। कोट/मोर्चा सुरक्षित नहीं हैं। हथियार रखने के लिए सुरक्षित जगह का अभाव है। जो वाहन मिले हैं, वे तय मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे। अब एकाएक होटल या पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा मुहैया कराई गई जगह को खाली करना, सुरक्षात्मक दृष्टि से सही नहीं है। इस बाबत कई एडहॉक कमांडेंट ने स्टेट फोर्स कोऑर्डिनेटर तक अपनी बात पहुंचाई है।