कुल्लू में बुनकर उद्योग का कारोबार करोड़ों का है। जीएसटी कम होने से बुनकर से जुड़े कारोबारी और ग्राहक दोनों खुश हैं। उत्पादों के सस्ता होने से बुनकर उद्योग में और भी गति आने की उम्म्मीद है। जिले में तैयार होने वाले कुल्लवी शॉल, टोपी, मफलर, स्टॉल और ऊनी जैकेट, जिनकी कीमत 2,500 रुपये से नीचे है, ये सस्ते हो गए हैं। जबकि इससे अधिक महंगे उत्पादों पर 18 फीसदी जीएसटी है। कुल्लवी शॉल, टोपी, मफलर, स्टॉल और ऊनी जैकेट को सबसे अधिक मध्यम वर्ग के लोग खरीदते हैं।
जिले में करीब 400 के करीब बुनकर लघु उद्योग हैं। जबकि कई लोग ऐसे हैं जो घर में खड्डी (बुनकर उपकरण) लगाकर शॉल, टोपी, मफलर, जुराबें, स्टॉल को तैयार कर रोजगार कमा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी हजारों में है। विश्व प्रसिद्ध भुट्टिको के सलाहकार रमेश ठाकुर ने कहा कि 2,500 से कम कीमत वाले उत्पाद सस्ते हो गए है। भुट्टिको संस्थान में करीब 1,200 लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 12 से पांच प्रतिशत जीएसटी दर रहने से मध्यम वर्ग को फायदा होगा। 2500 रुपये तक की खरीदारी पर 105 रुपये की बचत होगी।
उद्योग विभाग के पास बुनकर उद्योग के करीब 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। जबकि 7,000 से अधिक लोगों को बुनकर कार्ड जारी किए गए हैं। जो इन उद्योगों में रोजगार कमाते हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोग भी बुनकर से जुड़े हैं जो खुद अपने घर में शॉल, मफलर, टोपी, जुराबें, स्टॉल आदि को तैयार कर रोजगार कमा रहे है। - पीएल नेगी, प्रबंधक, जिला उद्योग विभाग कुल्लू।