याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय में सीनियर प्राइवेट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 19 फरवरी 2024 को एक कार्यालय आदेश जारी कर उनका तबादला चीफ वार्डन कार्यालय से कंसट्रक्शन डिवीजन (निर्माण विंग) में कर दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के अनुसार, कंस्ट्रक्शन डिवीजन में सीनियर प्राइवेट सेक्रेटरी का कोई पद ही स्वीकृत नहीं है। आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता को जानबूझकर अपमानित करने के लिए वहां भेजा गया, जहां उनसे जूनियर स्टेनोग्राफर का काम लेने का प्रयास किया जा रहा था। उन्हें एक ऐसे असिस्टेंट इंजीनियर के अधीन काम करने को मजबूर किया गया, जिसका पे-स्केल उनके बराबर था। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी को उसके दर्जे के मुताबिक ही काम और पोस्टिंग मिलनी चाहिए। वहीं विश्वविद्यालय ने दलील दी कि कर्मचारी का तबादला करना यूनिवर्सिटी का विशेषाधिकार है। यह निर्णय प्रशासनिक अनिवार्यताओं को देखते हुए लिया गया था। उन्होंने कहा कि कर्मचारी यह तय नहीं कर सकता कि उसे कहां तैनात किया जाए।