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हिमाचल प्रदेश: बिलासपुर एम्स में बोन मैरो ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी की सुविधा जल्द, नड्डा ने दी जानकारी

Fri, 03 Oct 2025 09:22 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

शुक्रवार को एम्स के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जानकारी दी कि एम्स में बोन मैरो ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी जल्द शुरू होगी। यहां ट्रामा सेंटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। 
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एम्स बिलासपुर में जेपी नड्डा का स्वागत करते फैकल्टी सदस्य। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर एम्स में बोन मैरो ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी जल्द शुरू होगी। यहां ट्रामा सेंटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। शुक्रवार को एम्स के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर को देश के टॉप संस्थानों की सूची में शामिल करना उनकी प्राथमिकता है।

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इस अवसर पर नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के लिए वर्ष 2025-26 की कार्यान्वयन योजना के तहत 123 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। इनमें से 73.13 करोड़ रुपये मातृ-शिशु विंग पर खर्च होंगे। शेष राशि मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को मिलेगी। इनमें हमीरपुर को 34 करोड़, नाहन को 11 करोड़, बिलासपुर को 4.5 करोड़, नूरपुर को 3 करोड़, मंडी को 1.65 करोड़ और ऊना को 1 करोड़ मिलेंगे। जिन स्थानों पर मातृ-शिशु विंग का निर्माण पूरा हो चुका है, वहां उपकरण खरीद के लिए 18 करोड़ और लक्ष्य कार्यक्रम (प्रसव कक्ष गुणवत्ता सुधार) के लिए 32 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। नड्डा ने कहा कि यह राशि 2026 तक खर्च की जाए तभी आगे की राशि जारी की जाएगी। उन्होंने एम्स बिलासपुर में 72.97 करोड़ से मल्टीलेवल कार पार्किंग के निर्माण की भी घोषणा की, जिसमें 624 वाहनों की क्षमता होगी।

स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि एम्स बिलासपुर की स्थापना से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। यह संस्थान हिमाचल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लोगों के लिए भी वरदान बन रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से इलाज को और सटीक बनाया जा सकता है। उन्होंने एम्स के डॉक्टरों, फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता ही इस संस्थान को विशेष बनाती है।

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