बिजली महादेव के लिए 283 करोड़ रुपये से बनने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का मामला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में पहुंच गया है। एनजीटी ने हिमाचल सरकार, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड, केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, वन विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उपायुक्त कुल्लू को भी नोटिस जारी किया है। सभी को 25 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा गया है। एनजीटी ने स्थानीय निवासी नचिकेता शर्मा की ओर से दायर याचिका पर यह कार्रवाई की है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए अभी तक देवदार के 77 पेड़ काटे जा चुके हैं। उन्होंने एनजीटी को हाल ही में मानसून में परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन के बारे में भी बताया है और परियोजना को जल्द रोकने की मांग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि परियोजना को आवश्यक अध्ययन किए बिना ही मंजूरी दी गई है। बता दें कि लगभग 2.4 किलोमीटर लंबे रोपवे का स्थानीय लोग तीन साल से विरोध कर इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसके निर्माण से न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। रोपवे जिला मुख्यालय के साथ पिरडी से बिजली महादेव मंदिर को जोड़ेगा। परियोजना का शिलान्यास मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वर्चुअल माध्यम से किया था। निर्माण की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड को सौंपी गई है। रोपवे से सैलानी पिरडी से बिजली महादेव तक सात मिनट में पहुंच सकेंगे।